जब क्रेता और विक्रेता दोनों अधिक हों तो कोई एक व्यक्ति कीमत तय नहीं कर सकता। हर क्रेता अगले ठेले तक जा सकता है; हर विक्रेता अगले ग्राहक की प्रतीक्षा कर सकता है। ऐसे हजारों छोटे-छोटे निर्णयों से एक सर्वमान्य, चलती हुई कीमत बन जाती है।
अमरूद लेकर बैठे विक्रेता अधिक → क्रेता आगे बढ़ सकते हैं → कीमत घटती है
दोनों शक्तियाँ मिलकर → वह कीमत जो “विक्रेता के लिए पर्याप्त रूप से अधिक और क्रेता के लिए पर्याप्त रूप से कम हो”
कीमतें दो दिशाओं में प्रतिक्रिया करती हैं —
- कीमत अंतःक्रिया के अनुसार बदलती है — जब क्रेता कम अमरूदों के लिए होड़ करें तो बढ़ती है, और जब विक्रेता कम क्रेताओं के लिए होड़ करें तो घटती है।
- अंतःक्रिया कीमत के अनुसार बदलती है — ऊँची कीमत पर क्रेता कम खरीदते हैं और विक्रेता अधिक लाते हैं; कम कीमत पर उलटा होता है। अध्याय का निष्कर्ष यही है — समय के साथ “विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराई गई वस्तुओं की मात्रा तथा क्रेता द्वारा अपेक्षित मूल्य से वस्तुओं की उस कीमत के निर्धारण में सहायता मिलती है”।