अन्वेषण अध्याय 2 महत्वपूर्ण प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरीक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर

हम मौसम के पाँच तत्वों को मापकर मौसम का आकलन करते हैं। प्रत्येक तत्व का अपना उपकरण और अपनी इकाई है। निरीक्षण का अर्थ है — इन मापों को प्रतिदिन एक ही निश्चित समय पर लेना और उनका अभिलेख रखना।

मौसम का तत्वउपकरणइकाई
तापमानतापमापी (थर्मामीटर)डिग्री सेल्सियस (°C)
वर्षणवर्षामापी (रेन गेज)मिलीमीटर (मि.मी.)
वायुमंडलीय दाबवायुदाबमापी (बैरोमीटर)मिलीबार (mb)
पवनवात दिक्सूचक यंत्र (दिशा), पवन वेगमापी (गति)किमी/घंटा
आर्द्रताआर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर)सापेक्षिक आर्द्रता (%)

ये सभी उपकरण मौसम केंद्र में एक साथ लगे होते हैं, जहाँ नियमित अंतराल पर मापें ली जाती हैं। स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) यही कार्य संवेदकों की सहायता से स्वयं कर लेता है और ऐसे स्थानों पर भी काम करता है जहाँ कोई व्यक्ति नहीं रह सकता — जैसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2023 में सिक्किम की एक हिम-झील पर, समुद्रतल से 4800 मीटर से भी अधिक ऊँचाई पर स्थापित केंद्र।

ऐसा क्यों: ‘गर्म’, ‘ठिठुरन’ या ‘भारी वर्षा’ जैसे शब्दों का अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। किंतु किसी सर्वमान्य पैमाने पर लिखी संख्या का अर्थ सबके लिए एक ही होता है — इसलिए चेन्नई में लिया गया पाठ्यांक कश्मीर के पाठ्यांक से तुलना योग्य बन जाता है।
क्या आप जानते हैं? उपकरणों से बहुत पहले से मनुष्य मौसम का निरीक्षण करता आया है — पक्षियों का कम ऊँचाई पर उड़ना, चींटियों का अपने अंडे ऊँचे स्थानों पर ले जाना, मेढ़कों की तेज टरटराहट या चीड़ के शंकुओं का खुलना और बंद होना। यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा है और आज भी भारत के अनेक भागों में, विशेषकर मानसून के आगमन का अनुमान लगाने के लिए, उपयोग होता है।
प्र2.
भारी वर्षा, तूफान, सूखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में मौसम की भविष्यवाणियाँ किस प्रकार हमारी सहायता करती हैं?
उत्तर

पूर्वानुमान हमें घटना घटित होने से पहले कार्य करने का समय देता है। मौसम-विज्ञानी तापमान, दाब, पवन, वर्षा और आर्द्रता के लंबे अभिलेखों का अध्ययन करते हैं और वैज्ञानिक विधियों से बताते हैं कि आने वाले घंटों, दिनों या सप्ताहों में मौसम कैसा रहेगा।

  • समुद्र में तूफान और भारी वर्षा — मछुआरों को नाव न ले जाने की चेतावनी दी जाती है और चक्रवात की आशंका होने पर पूरे तटीय क्षेत्र को खाली कराया जा सकता है।
  • स्थल पर भारी वर्षा — स्थानीय सरकारें निचले क्षेत्रों से लोगों को हटाती हैं, नावें और पंप तैयार रखती हैं तथा राहत सामग्री का भंडारण करती हैं।
  • सूखा — किसान कम पानी में पकने वाली या कम अवधि की फसल चुन सकते हैं और तालाबों तथा जलाशयों का पानी पहले से ही सोच-समझकर बाँटा जा सकता है।
  • ताप लहर — विद्यालयों का समय बदला जाता है, अस्पताल लू लगने के रोगियों के लिए तैयार रहते हैं और खुले में काम करने वालों के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाती है।
  • दैनिक जीवन — वायुयान चालक और नाविक पवन के आँकड़ों का उपयोग करते हैं, किसान बुआई और कटाई का समय तय करते हैं, और एक परिवार जान पाता है कि विद्यालय की यात्रा में छाता ले जाना है या नहीं।
आज यह क्यों अधिक आवश्यक है: जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, बाढ़, चक्रवात और ताप लहर जैसी गंभीर मौसमी घटनाएँ अधिक होती जा रही हैं। पूर्वानुमान चक्रवात को रोक नहीं सकता, किंतु यह तय कर सकता है कि उसके मार्ग में कितने लोग खड़े रह जाएँ।
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