विश्व की लगभग हर प्रकार की जलवायु भारत में एक साथ मिलती है, क्योंकि जलवायु बनाने वाले पाँचों कारक भारत में बहुत अधिक बदलते हैं — अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवनें और स्थलाकृति।
| कारक | भारत में कितना बदलता है | परिणाम |
|---|---|---|
| अक्षांश | भूमध्य रेखा के निकट निकोबार द्वीपसमूह से लेकर सुदूर उत्तर के लद्दाख तक | कन्याकुमारी और निकोबार लगभग पूरे वर्ष गर्म; श्रीनगर और लेह ठंडे |
| ऊँचाई | समुद्र तल से लेकर कई किलोमीटर ऊँचे हिमालयी शिखरों तक | शिखरों पर अल्पाइन, नीचे समशीतोष्ण पर्वतीय स्थल और उनसे नीचे तप्त मैदान |
| समुद्र से निकटता | बहुत लंबी तटरेखा, पर साथ ही तट से बहुत दूर स्थित स्थान भी | मुंबई का हल्का 32°C–18°C बनाम नागपुर का चरम 44°C–10°C |
| पवनें | अरब से आने वाली गर्म शुष्क पवनें, हिमालय पार से ठंडी पवनें, समुद्र से नम मानसूनी पवनें | उत्तर-पश्चिम में ताप लहर, गिरिपाद में शीत लहर, तटों पर भारी मानसूनी वर्षा |
| स्थलाकृति | पर्वत, पठार, मैदान और समतल मरुस्थल | हिमालय मध्य एशिया की ठंड से बचाता है; पश्चिमी घाट मानसून से वर्षा निचोड़ लेता है |
इसी का परिणाम है पृष्ठ 48 की सूची — एक ही देश में सात प्रकार की जलवायु:
- अल्पाइन — हिमालय पर्वत : अत्यधिक ठंडी, बर्फीली शीत ऋतु और शीतल ग्रीष्म।
- समशीतोष्ण — हिमालय के निचले तथा अन्य पहाड़ी क्षेत्र : कम ठंडी सर्दियाँ, बहुत गर्म न होने वाली गर्मियाँ। यहीं पर्वतीय पर्यटन स्थल हैं।
- उपोष्ण कटिबंधीय — उत्तरी मैदान : अत्यधिक गर्म ग्रीष्म, ठंडी शीत ऋतु। यहीं भारत का अधिकांश गेहूँ उगता है।
- शुष्क — पश्चिम में थार मरुस्थल : अत्यधिक गर्म दिन, ठंडी रातें, बहुत कम वर्षा।
- उष्णकटिबंधीय आर्द्र — पश्चिमी तटीय पट्टी : भारी मानसूनी वर्षा, चावल और मसालों के अनुकूल।
- अर्ध-शुष्क — मध्य दक्कन पठार : गर्म ग्रीष्म, हल्की सर्दी, सामान्य वर्षा।
- उष्णकटिबंधीय — पूर्वी भारत एवं दक्षिणी प्रायद्वीप : हल्की सर्दी तथा मानसूनी पवनों द्वारा नियंत्रित अलग-अलग आर्द्र और शुष्क अवधियाँ।