प्र1.
हम जानते हैं कि ये स्थान मैदानों की तुलना में अधिक ऊँचाई पर स्थित हैं, लेकिन यह उनके ठंडे तापमान की व्याख्या कैसे करता है?
उत्तर
अध्याय दो सरल कारण देता है कि ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान क्यों घटता है।
- वायु विरल हो जाती है। ऊँचाई बढ़ने के साथ वायुमंडलीय दबाव और उसके परिणामस्वरूप वायु का घनत्व कम हो जाता है (जैसा हमने ‘मौसम को समझना’ अध्याय में पढ़ा था), और घनत्व घटने पर वायु ठंडी होती जाती है।
- तप्त सतह से दूरी। सूर्य पृथ्वी की सतह को गर्म करता है और वायु नीचे से गर्म होती है। इसलिए सतह से जितनी अधिक दूरी होगी, हवा उतनी ही कम गर्म होगी।
इसीलिए हिमालय इतना ऊँचा है कि उसके कई शिखरों का तापमान जल के हिमांक से नीचे रहता है और वे वर्ष भर हिम से ढँके रहते हैं — और इसीलिए पर्वतीय स्थल लोकप्रिय पर्यटन केंद्र हैं।
| पर्वतीय पर्यटन स्थल | राज्य / क्षेत्र |
|---|---|
| मुन्नार, थेनी, उधगमंडलम (ऊटी) | केरल और तमिलनाडु — पश्चिमी घाट एवं नीलगिरि |
| मदिकेरी, महाबलेश्वर | कर्नाटक और महाराष्ट्र — पश्चिमी घाट |
| माउंट आबू | राजस्थान — अरावली शृंखला |
| शिमला, नैनीताल, दार्जिलिंग | हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल — हिमालय |
| तवांग, शिलांग | अरुणाचल प्रदेश और मेघालय — पूर्वोत्तर |
संकेत: पर्वत चढ़ते समय लोग सोचते हैं कि सूर्य के पास जाने से गर्मी बढ़नी चाहिए। किंतु 15 करोड़ किलोमीटर में से कुछ किलोमीटर घटने का कोई अर्थ नहीं है। असली कारण विरल वायु और तप्त धरातल से बढ़ती दूरी है।