कक्षा 6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में आप जल-चक्र के बारे में पढ़ चुके हैं! “महासागर और पृथ्वी की सतह से पानी वाष्प के रूप में वायुमंडल में चला जाता है और वर्षा, ओले या हिम के रूप में वापस पृथ्वी पर लौटता है...”
उत्तर
याद आ गया — अब देखिए कि यह इसी अध्याय में क्यों रखा गया है। जल-चक्र ही वह तंत्र है जिस पर पवनों वाला पूरा भाग टिका है।
जल समुद्र से वाष्प बनकर उठता है, पवन उसे स्थल के ऊपर ले जाती है और वह वर्षण के रूप में लौटता है। बीच में पवन न हो तो जल फिर समुद्र में ही गिर जाए।
तीन चरण, और प्रत्येक का पवन से संबंध :
वाष्पीकरण — महासागर और पृथ्वी की सतह से जल अदृश्य वाष्प बनकर उठता है। इसीलिए समुद्र पार करके आई पवन नम होती है, और अरब तथा अफगानिस्तान के मरुस्थलों से आई पवन शुष्क।
परिवहन — पवन उस वाष्प को स्थल के ऊपर ले जाती है। पवनें न केवल तापमान, बल्कि आर्द्रता और उसके परिणामस्वरूप वर्षण को भी प्रभावित करती हैं।
संघनन और वापसी — वाष्प संघनित होकर बादल बनती है और वर्षा, ओले या हिम के रूप में लौट आती है।
यह अगले भाग के लिए क्यों जरूरी है: मानसून इसी चक्र का विशाल पैमाने पर और वार्षिक समय-सारणी पर चलना है। समुद्री पवनें नमी उठाती हैं, तप्त भारतीय भूभाग उन्हें ऊपर उठाकर ठंडा करता है, और जल मानसूनी वर्षा बनकर गिरता है। जल-चक्र याद रहे तो मानसून रहस्य नहीं रह जाता।
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