अन्वेषण अध्याय 3 इसे अनदेखा न करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मेघालय स्थित मौसिनराम विश्व की सर्वाधिक, लगभग 11000 मि.मी. (11 मीटर) औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है।
उत्तर

यह संख्या रुककर सोचने योग्य है। एक वर्ष में ग्यारह मीटर वर्षा का अर्थ है तीन मंजिला भवन से भी ऊँचा जल — और वह भी एक ही स्थान पर।

11,000 मि.मी. = वर्ष भर में 11 मीटर वर्षा
संपूर्ण भारत का औसत ≈ 1,200 मि.मी.
अर्थात मौसिनराम को भारतीय औसत से लगभग 9 गुना वर्षा मिलती है

मौसिनराम ही क्यों? यहाँ अध्याय के कारक एक साथ काम करते हैं :

  • नमी से लदी पवनें बंगाल की खाड़ी से उत्तर की ओर बांग्लादेश के समतल, आर्द्र मैदानों को पार करती हैं — जल के ऊपर इतना लंबा मार्ग कि उन्हें सुखाने वाला कुछ नहीं मिलता।
  • फिर वे सीधे खासी पहाड़ियों से टकराती हैं। यही स्थलाकृति की भूमिका है : पहाड़ियाँ वायु को तेजी से ऊपर उठने पर विवश कर देती हैं।
  • ऊपर उठती वायु ठंडी होती है, वाष्प संघनित होती है और जल उसी ढलान पर, मानसून के महीनों तक दिन-प्रतिदिन बरसता रहता है।
क्या आप जानते हैं? पास ही स्थित चेरापूंजी (सोहरा) के नाम एक ही वर्ष में सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड है। इतने जल के बावजूद दोनों स्थानों पर शुष्क ऋतु में जल की कमी हो जाती है, क्योंकि तीखे ढलान वर्षा को उतनी ही तेजी से बहा ले जाते हैं जितनी तेजी से वह गिरती है।
प्र2.
मानसून ने कर्नाटक और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में अनेक रागों को प्रेरित किया है। ‘मेघमल्हार’ और ‘अमृतवर्षिणी’ उनमें से कुछ प्रमुख हैं।
उत्तर

दोनों नाम वर्षा के शब्दों से बने हैं — और यही इस बॉक्स का संदेश है : भारत में मानसून केवल आर्थिक घटना नहीं, देश की कला का अंग है।

रागपरंपरानाम का अर्थ
मेघमल्हारहिंदुस्तानीमेघ = बादल; मल्हार वर्षा-रागों का पूरा परिवार है
अमृतवर्षिणीकर्नाटक (कर्नाटिक)अमृत = सुधा, वर्षिणी = बरसाने वाली — ‘जो अमृत बरसाए’

प्रसिद्ध मान्यता है कि तानसेन मेघ मल्हार गाकर वर्षा करा देते थे, और मुत्तुस्वामी दीक्षितर ने अमृतवर्षिणी गाकर सूखा समाप्त किया था। इन कथाओं को अक्षरशः लें या न लें, ये दिखाती हैं कि भारतीय संस्कृति ने मानसून को संगीत में कितनी गहराई से बुना है।

यह कीजिए: दोनों में से एक-एक रचना सुनिए और देखिए कि उनमें क्या समान है — दोनों प्रायः वर्षा ऋतु में गाए जाते हैं और दोनों बादल फटने की प्रतीक्षा का भाव जगाते हैं।
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