प्र1.
भारत में मानसूनी वर्षा का पूर्वानुमान सदैव से ही जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। हमारे पूर्वजों ने अपने आस-पास की प्रकृति के संकेतों को ध्यान से देखा और अपने अनुभवों से स्थानीय पारंपरिक ज्ञान विकसित किया। यह पारंपरिक ज्ञान एक महत्वपूर्ण विरासत है, जिसे हमें संरक्षित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कोंकण तट पर मछुआरे मानसून के आगमन की भविष्यवाणी करते हैं, जब जल के नीचे रहने वाली मछलियाँ सतह पर दिखाई देने लगती हैं। दक्षिण भारत के कुछ भागों में यह माना जाता है कि मानसून गोल्डन शॉवर ट्री या अमलतास (कैसिया फिस्टुला) के खिलने के 50 दिनों के भीतर आ जाता है। कुछ समुदायों का यह भी मानना है कि जब कौए अपने घोंसले पेड़ की चोटी पर बनाते हैं तो यह कम वर्षा का संकेत देता है, जबकि अगर घोंसले नीचे हैं तो भारी वर्षा होने की संभावना होती है। अपने क्षेत्र में वर्षा, कोहरे, हिम या सहिमवृष्टि के बारे में ऐसे स्थानीय ज्ञान की एक सूची बनाइए।
उत्तर
सूची कैसे बनाएँ। उन लोगों से बात कीजिए जिनकी आजीविका आकाश पढ़ने पर टिकी है — किसान, मछुआरे, गड़रिए, माली, कुम्हार और राजमिस्त्री। प्रत्येक संकेत के लिए चार बातें लिखिए : संकेत क्या है, वह किसका सूचक माना जाता है, कितने दिन पहले, और किसने बताया। फिर एक ऋतु तक डायरी रखिए और प्रत्येक संकेत के आगे लिखिए ‘सही निकला / नहीं निकला’।
नमूना उत्तर — एक विद्यार्थी द्वारा एकत्र की गई सूची :
| देखा गया संकेत | माना जाता है कि | संभावित वैज्ञानिक कारण |
|---|---|---|
| चींटियाँ अंडे लेकर लंबी कतार में ऊँची जगह की ओर जा रही हों | एक-दो दिन में भारी वर्षा | कीट वायुदाब की गिरावट और आर्द्रता की वृद्धि को भाँप लेते हैं |
| मोर का बोलना और नाचना | मानसून निकट है | उनका प्रजनन काल पहली वर्षा से जुड़ा होता है |
| अबाबील और व्याध-पतंगों (ड्रैगनफ्लाई) का बहुत नीचे उड़ना | उसी संध्या वर्षा | नम, भारी वायु में छोटे कीट जमीन के पास रहते हैं |
| चंद्रमा के चारों ओर घेरा | दो-तीन दिन में वर्षा | ऊँचे पतले सिरस बादल, जो प्रायः वर्षा तंत्र से आगे चलते हैं |
| पशुओं का बैठने से इनकार करना या सिमटकर खड़े होना | तूफान आने वाला है | पशु दाब और पवन के परिवर्तन पर प्रतिक्रिया करते हैं |
| शीत ऋतु में खेतों पर सवेरे घना कोहरा | दिन साफ, ठंडा और वर्षारहित | कोहरा शांत, स्वच्छ रातों में बनता है जब धरती की ऊष्मा निकल जाती है |
| अमलतास का पूरा खिल जाना | लगभग 50 दिनों में मानसून | यह वृक्ष मानसून-पूर्व तापमान वृद्धि के साथ फूलता है |
यह ज्ञान आदर के योग्य क्यों है: इन लोगों के पास उपग्रह नहीं थे। उनके पास था एक ही स्थान का पीढ़ियों लंबा सावधान अवलोकन — और जीव-जंतु तथा पौधे सचमुच दाब, आर्द्रता और तापमान के परिवर्तन पर हमसे पहले प्रतिक्रिया करते हैं। आधुनिक पूर्वानुमान बड़े क्षेत्रों के लिए अधिक सटीक है, पर पारंपरिक संकेत स्थानीय, निःशुल्क और तत्काल हैं। अध्याय इसे ‘एक महत्वपूर्ण विरासत’ कहता है, और इसे खोने का सबसे सरल तरीका है इसे न लिखना।
स्वयं जाँचिए: संकेत लिखते समय उसकी तिथि और वास्तविक वर्षा की तिथि दोनों लिखिए। जो संकेत पाँच में से चार बार सही उतरे, वह वास्तविक स्थानीय ज्ञान है; जो पाँच में से एक बार, वह केवल कहावत।