प्र1.
निम्नलिखित तालिका में प्रत्येक वर्ग में ‘हाँ’ (सही का चिह्न) या ‘नहीं’ (काटने का चिह्न) भरें, जो भारतीय सभ्यता के दोनों चरणों की एक रोचक तुलना करती है।
उत्तर
पूर्ण की गई तालिका, प्रत्येक वर्ग के कारण सहित:
| प्रथम नगरीकरण | द्वितीय नगरीकरण | कारण | |
|---|---|---|---|
| गंगा का मैदान | नहीं ✗ | हाँ ✓ | हड़प्पा के नगर सिंधु तथा सरस्वती घाटी में थे; द्वितीय नगरीकरण का आरंभ ही गंगा के मैदान से हुआ। |
| बौद्ध मठ | नहीं ✗ | हाँ ✓ | बौद्ध एवं जैन धर्म तथा यात्रा करने वाले भिक्षु-भिक्षुणियाँ महाजनपद युग की देन हैं। |
| साहित्य | नहीं ✗ | हाँ ✓ | हड़प्पावासियों के पास लेखन-प्रणाली थी, परंतु वह आज तक अपठित है और कोई साहित्य उपलब्ध नहीं। दूसरे चरण में उत्तर वैदिक, बौद्ध तथा जैन साहित्य नवीन नगरों के उल्लेखों से भरा है। |
| व्यापार | हाँ ✓ | हाँ ✓ | दोनों चरणों में व्यापक व्यापार हुआ — हड़प्पावासियों का पश्चिम एशिया से, महाजनपदों का संपूर्ण भारत तथा विदेशों से; इसी कारण सिक्कों की आवश्यकता पड़ी। |
| युद्धकला | नहीं ✗ | हाँ ✓ | हड़प्पा नगरों से युद्ध के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। इस अध्याय में समीपवर्ती महाजनपदों के मध्य युद्धों के कुछ प्रमाण तथा लोहे के हथियारों का उल्लेख है। |
| ताम्र/कांस्य | हाँ ✓ | हाँ ✓ | हड़प्पा सभ्यता ताम्र व कांस्य धातुकला में दक्ष थी; ये धातुएँ बाद में भी चलती रहीं — दूसरे चरण में तांबे के सिक्के बने। |
| लोहा | नहीं ✗ | हाँ ✓ | लोहा द्वितीय नगरीकरण का ‘महत्वपूर्ण तकनीकी परिवर्तन’ है — कृषि के उपकरण तथा कांस्य से हल्के व तीक्ष्ण हथियार। |
यह प्रतिरूप ऐसा क्यों है: ✗ वाले वर्गों को ऊपर से नीचे पढ़िए और दोनों युगों का अंतर एक दृष्टि में मिल जाएगा — नया क्षेत्र (गंगा का मैदान), नया धार्मिक-साहित्यिक संसार (मठ एवं ग्रंथ), नई धातु (लोहा) और उसके साथ आया राज्यों का संघर्ष। जिन दो पंक्तियों में ✓✓ है, वे बताती हैं कि क्या अपरिवर्तित रहा — व्यापार तथा ताम्र-कांस्य कर्म।
स्वयं जाँचें: यहाँ ‘नहीं’ का अर्थ है अब तक प्रमाण नहीं मिला, न कि असंभव। इतिहासकार उपलब्ध साक्ष्यों से काम करते हैं और हड़प्पा लिपि आज भी अपठित है — यदि वह कभी पढ़ी गई, तो इनमें से कोई वर्ग बदलना पड़ सकता है।