अन्वेषण अध्याय 4 नवारंभ— नगर एवं राज्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

भारत का ‘प्रथम नगरीकरण’ समाप्त हुआ और लगभग एक सहस्राब्दी तक नगरीय जीवन लुप्त रहा। द्वितीय सहस्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में सिंधु/हड़प्पा/सिंधु-सरस्वती सभ्यता का विघटन हो गया। नगर परित्यक्त हो गए या लोग ग्राम्य जीवन-शैली की ओर लौट गए, क्योंकि नगरीय व्यवस्था के सभी घटक — भव्य भवन, व्यस्त बाजार, विशिष्ट शिल्पकार-समूह, लेखन-प्रणाली, स्वच्छता व्यवस्था, शासन तंत्र तथा शासक वर्ग — लुप्त हो गए थे। ‘द्वितीय नगरीकरण’ प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में आरंभ हुआ — गंगा के मैदानी भाग, सिंधु घाटी के कुछ क्षेत्रों तथा निकटवर्ती प्रदेशों में, और क्रमशः संपूर्ण उपमहाद्वीप में फैला। इसके साक्ष्य दो स्रोतों से मिलते हैं — पुरातात्विक उत्खनन तथा प्राचीन साहित्य (उत्तर वैदिक, बौद्ध एवं जैन)। यह चरण आज तक अनवरत चल रहा है। जनपदों से महाजनपद बने। द्वितीय सहस्राब्दी सा.सं.पू. के उत्तरार्ध में कुल एक नियत भूभाग से जुड़

  1. महत्वपूर्ण प्रश्न
  2. पाठ्य प्रश्न
  3. आइए विचार करें
  4. आइए पता लगाएँ
  5. आइए पता लगाएँ
  6. आइए पता लगाएँ
  7. इसे अनदेखा न करें
  8. आइए विचार करें
  9. आगे बढ़ने से पहले…
  10. प्रश्न और क्रियाकलाप
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ