कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 4 नवारंभ— नगर एवं राज्य के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
भारत का ‘प्रथम नगरीकरण’ समाप्त हुआ और लगभग एक सहस्राब्दी तक नगरीय जीवन लुप्त रहा। द्वितीय सहस्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में सिंधु/हड़प्पा/सिंधु-सरस्वती सभ्यता का विघटन हो गया। नगर परित्यक्त हो गए या लोग ग्राम्य जीवन-शैली की ओर लौट गए, क्योंकि नगरीय व्यवस्था के सभी घटक — भव्य भवन, व्यस्त बाजार, विशिष्ट शिल्पकार-समूह, लेखन-प्रणाली, स्वच्छता व्यवस्था, शासन तंत्र तथा शासक वर्ग — लुप्त हो गए थे। ‘द्वितीय नगरीकरण’ प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में आरंभ हुआ — गंगा के मैदानी भाग, सिंधु घाटी के कुछ क्षेत्रों तथा निकटवर्ती प्रदेशों में, और क्रमशः संपूर्ण उपमहाद्वीप में फैला। इसके साक्ष्य दो स्रोतों से मिलते हैं — पुरातात्विक उत्खनन तथा प्राचीन साहित्य (उत्तर वैदिक, बौद्ध एवं जैन)। यह चरण आज तक अनवरत चल रहा है। जनपदों से महाजनपद बने। द्वितीय सहस्राब्दी सा.सं.पू. के उत्तरार्ध में कुल एक नियत भूभाग से जुड़
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | पुस्तक से उदाहरण |
|---|---|---|---|
| द्वितीय नगरीकरण | प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में आरंभ हुआ नगरीय जीवन का नया चरण | पृष्ठ 68–69 | गंगा के मैदान व सिंधु घाटी से आरंभ; “आज तक अनवरत चलता आ रहा है” |
| जनपद | एक कुल का नियत भूभाग, जिसका शासक राजा होता था | पृष्ठ 69 | संस्कृत में — “जहाँ ‘जन’ ने अपने पद रखे हों” |
| महाजनपद | प्रारंभिक जनपदों के मिलने से बनी विशाल राजकीय इकाई | पृष्ठ 69 | प्रचलित सूची में 16 — गांधार से अंग तथा अश्मक तक |
| सभा / समिति | कुल की सभा या परिषद | पृष्ठ 70 | ये शब्द सर्वप्रथम वेदों में मिलते हैं |
| गण / संघ | वह महाजनपद जो राजतंत्र नहीं था | पृष्ठ 72 | वज्जि (वृज्जि) एवं मल्ल — विद्वानों के ‘प्रारंभिक गणराज्य’ |
| परिखा (खाई) | किले या किलेबंद शहर के चारों ओर गहरा-चौड़ा गड्ढा जिसमें पानी भरा होता था | हाशिया, पृष्ठ 70 | शिशुपालगढ़ के द्वार के बाहर जल से भरी परिखा (चित्र 4.7) |
| आहत सिक्के | भारत के प्रथम सिक्के — नरम चाँदी पर प्रतीक ‘आहत’ कर अंकित | पृष्ठ 73–75 | चित्र 4.6 — उत्तर भारत के प्राचीन नगरों से प्राप्त सिक्के |
| जाति | विशेष पेशे या जीविका से जुड़ा समुदाय | पृष्ठ 76 | कृषि, धातुकर्म, वाणिज्य या हस्तकला में दक्षता, पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित |
| वर्ण | वैदिक ग्रंथों से उद्भूत चार श्रेणियाँ | पृष्ठ 76 | ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र |
| कास्ट | पुर्तगाली शब्द ‘कास्टा’ से बना अंग्रेजी शब्द | इसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 76 | 16वीं शताब्दी के पुर्तगाली यात्रियों द्वारा प्रयुक्त |
| उत्तरापथ | उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों से गंगा के मैदानों और पूर्वोत्तर भारत तक का मार्ग | पृष्ठ 77–78 | व्यापार, तीर्थयात्रा तथा सैन्य अभियानों हेतु प्रयुक्त |
| दक्षिणापथ | कौशांबी से विंध्य पार कर दक्षिण भारत तक का मार्ग | पृष्ठ 78 | कौशांबी आज के प्रयागराज के समीप है |
अभ्यास
- महत्वपूर्ण प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- इसे अनदेखा न करें
- आइए विचार करें
- आगे बढ़ने से पहले…
- प्रश्न और क्रियाकलाप