प्र1.
आपने अंग्रेजी शब्द ‘कास्ट’ सुना होगा। यह शब्द पुर्तगाली भाषा के शब्द ‘कास्टा’ से आया है। 16वीं शताब्दी में जब पुर्तगाली यात्री भारत आए तो उन्होंने भारत की सामाजिक संरचना को समझने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया। कुछ विद्वान ‘कास्ट’ का प्रयोग वर्ण के संदर्भ में करते हैं। जबकि अधिकांश इसे जातियों के लिए उपयुक्त मानते हैं। कुछ दूसरे विद्वान ‘कास्ट’ शब्द का प्रयोग संपूर्ण वर्ण-जाति व्यवस्था को इंगित करने के लिए करते हैं।
उत्तर
इस बॉक्स का मूल बिंदु: ‘कास्ट’ भारतीय शब्द है ही नहीं। यह एक भारतीय वास्तविकता पर चिपकाया गया विदेशी लेबल है, और इसीलिए इसका प्रयोग इतना ढीला-ढाला है।
| शब्द | कहाँ से आया | वस्तुतः किसे इंगित करता है |
|---|---|---|
| वर्ण | वैदिक ग्रंथों से उद्भूत अवधारणा | चार श्रेणियाँ — ब्राह्मण (ज्ञान को सुरक्षित रखना व प्रसारित करना तथा यज्ञादि करना), क्षत्रिय (समाज व देश की रक्षा तथा आवश्यकता पड़ने पर युद्ध), वैश्य (व्यापार, व्यवसाय या कृषि से समाज की समृद्धि बढ़ाना), शूद्र (शिल्पकला, निर्माण, सेवा या अन्य कार्य) |
| जाति | भारतीय समाज स्वयं | विशेष पेशे या जीविका से जुड़ा समुदाय, जिसका कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता था और जो प्रायः उप-जातियों में विभक्त होता था — प्रत्येक के अपने विवाह, अनुष्ठान तथा भोजन-संबंधी रीति-रिवाज |
| कास्ट | पुर्तगाली कास्टा, 16वीं शताब्दी के यात्रियों द्वारा प्रयुक्त | कुछ विद्वान इसे वर्ण के लिए, अधिकांश जाति के लिए और कुछ संपूर्ण वर्ण-जाति व्यवस्था के लिए प्रयोग करते हैं |
यह भ्रम क्यों उत्पन्न हुआ: पुर्तगाली यात्रियों को ऐसा समाज मिला जो एक साथ दो प्रकार से संगठित था — ग्रंथों से आई चार वर्णों की अवधारणा, और धरातल पर जीवित सहस्रों व्यावसायिक जातियाँ। उनके पास दोनों के लिए एक ही शब्द था, अतः एक शब्द को दोनों पर फैलाना पड़ा। तभी से ‘कास्ट’ का अर्थ भिन्न-भिन्न लेखकों के लिए भिन्न रहा है।
संकेत: परीक्षा में लिखते समय वह भारतीय शब्द अवश्य लिखिए जो आपका अभिप्राय है — वर्ण या जाति — और फिर बताइए कि उस वाक्य में ‘कास्ट’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है। यही एक आदत अधिकांश भ्रम दूर कर देती है।