कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 साम्राज्यों का उदय के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

साम्राज्य अनेक छोटे राज्यों या क्षेत्रों का समूह होता है, जिन पर कोई एक शक्तिशाली शासक अधिकार रखता है। छोटे राजा अपने सिंहासन पर बने रहते थे, परंतु करद (भेंट देने वाले) बन जाते थे और सम्राट की अधिसत्ता स्वीकार करते थे। साम्राज्य छह स्तंभों पर टिका होता है — सेना , प्रशासन , कानून, मुद्रा तथा माप-तौल , संसाधनों पर नियंत्रण, कला एवं विद्या का प्रोत्साहन, तथा सड़कों और जल-मार्गों का संचार तंत्र । साम्राज्य का खर्च व्यापार से चलता था। व्यापारी श्रेणियों (गिल्ड्स) में संगठित थे, जिनका प्रमुख प्रायः निर्वाचित होता था और जो अपने नियम स्वयं बनाती थीं; राजा हस्तक्षेप नहीं करता था। उत्तरापथ और दक्षिणापथ दो प्रमुख व्यापारिक मार्ग थे। मगध का उदय गंगा के उपजाऊ मैदानों, इमारती लकड़ी और हाथियों वाले वनों, निकटवर्ती पर्वतों के लौह अयस्क तथा गंगा व सोन नदियों के कारण हुआ। अजातशत्रु, फिर महापद्म नंद ने इसे

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शब्दअर्थअध्याय में कहाँयाद रखने का सूत्र
साम्राज्यअनेक छोटे राज्यों या क्षेत्रों का समूह, जिन पर एक शक्तिशाली शासक अधिकार रखता है और राजधानी से शासन करता है‘साम्राज्य क्या है?’, पृष्ठ 87लैटिन imperium = ‘सर्वोच्च शक्ति’
करद राज्य (ट्रिब्यूटरी)वह शासक या राज्य जो सम्राट के अधीन हो गया है और भेंट — स्वर्ण, अन्न, पशु, हाथी — देता हैहाशिये की टिप्पणी, पृष्ठ 87सिंहासन बचा, स्वतंत्रता गई
सम्राज्, अधिराज, राजाधिराजसम्राट के लिए संस्कृत शब्द — ‘सबका स्वामी’, ‘अधिपति’, ‘राजाओं का राजा’पृष्ठ 87तीन शब्द, एक भाव — राजाओं के ऊपर का राजा
श्रेणी (गिल्ड)व्यापारियों, शिल्पकारों, साहूकारों या कृषकों का शक्तिशाली संगठन, जिसका प्रमुख निर्वाचित होता था‘व्यापार, व्यापारिक मार्ग तथा श्रेणियाँ’, पृष्ठ 91–93प्रतिस्पर्धी नहीं, सहयोगी
उत्तरापथ / दक्षिणापथउपमहाद्वीप के उत्तरी और दक्षिणी महामार्गचित्र 5.5, पृष्ठ 92उत्तर + पथ, दक्षिण + पथ
सप्तांगकौटिल्य के राज्य के सात अंग — स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्रचित्र 5.15, पृष्ठ 102सप्त = सात, अंग = भाग
अर्थशास्त्रकौटिल्य की प्रसिद्ध कृति — ‘शासन और अर्थव्यवस्था का शास्त्र’पृष्ठ 101–103प्रजा की प्रसन्नता में राजा की प्रसन्नता
क्षत्रपफारसी और ग्रीक साम्राज्यों में प्रांतों का शासक, जिसे सम्राट पीछे छोड़ जाता थाइसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 97पुरु एलेक्जेंडर का क्षत्रप बना
शिलालेखराजा या अधिकारियों द्वारा जनहित के लिए की गई आधिकारिक घोषणाहाशिये की टिप्पणी, पृष्ठ 104अशोक के संदेश चट्टानों और स्तंभों पर
देवानामपिय पियदसिअशोक का स्वयं के लिए प्रयुक्त नाम — ‘देवताओं के प्रिय’ तथा ‘दूसरों के प्रति दयालु’पृष्ठ 106राजा स्वयं को कैसे याद रखवाना चाहता था
धर्म (धम्म)नैतिक नियम तथा परिवार, समुदाय व राष्ट्र के प्रति कर्तव्य; गहरे अर्थ में ऋतम् के अनुसार जीवन-यापनइसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 107कर्तव्य, नियम, सत्य, व्यवस्था और नैतिकता — सब एक साथ
अंडस्तूप के केंद्र की बड़ी अर्धगोलाकार संरचना; यह ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती हैइसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 112उपासक इसकी परिक्रमा करते हैं — प्रदक्षिणा
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