अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जब युद्ध के उपरांत एलेक्जेंडर ने राजा पुरु से पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, तब पुरु ने उत्तर दिया — “एक राजा की तरह”। इस उत्तर से प्रभावित होकर एलेक्जेंडर ने उन्हें उनके ही राज्य का क्षत्रप नियुक्त कर दिया। अपने शिक्षकों की सहायता से राजा पुरु और एलेक्जेंडर के मध्य हुए युद्ध के विषय में और अधिक विवरण प्राप्त करें। अपने शोध के साथ-साथ अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग करते हुए इस युद्ध दृश्य का नाट्य मंचन करें।
उत्तर

यह शोध और नाट्य-मंचन की गतिविधि है, इसलिए यहाँ विधि और एक नमूना दृश्य दिया गया है।

चरण 1 — जो ज्ञात है, वह खोजिए। इस युद्ध का लगभग सारा विवरण ग्रीक लेखकों से आता है, भारतीय स्रोतों से नहीं। विद्यालय के पुस्तकालय या शिक्षक की सहायता से जुटाइए —

  • कहाँ: पंजाब में हाइडेस्पीज़ (झेलम) के तट पर, लगभग 326 सा.सं.पू.। ध्यान दीजिए कि पृष्ठ 96 के चित्र 5.10 में ‘हाइडेस्पीज़’ अंकित है।
  • कौन: मैसिडोनिया का एलेक्जेंडर, अनुभवी ग्रीक तथा सहयोगी सेना के साथ; और पुरु (पौरव), पैदल सेना, अश्वारोही, रथ तथा युद्ध-हाथियों की पंक्ति के साथ।
  • परिस्थितियाँ: नदी उफान पर थी और मानसूनी वर्षा ने धनुष की डोरियाँ ढीली और रथों के पहिये कीचड़ में धँसा दिए थे।
  • परिणाम: पुरु पराजित और घायल हुए, पर अंत तक लड़े; उनके उत्तर “एक राजा की तरह” से प्रभावित होकर एलेक्जेंडर ने उन्हें उनका राज्य लौटाकर क्षत्रप नियुक्त किया।
  • यह अवश्य बताइए कि कथा कौन कह रहा है। ये ग्रीक विवरण हैं, विजयी पक्ष के लिखे हुए। अच्छी परियोजना यह भी बताती है।

चरण 2 — नाटक में क्या-क्या हो: युद्ध से पहले का दृश्य (उफनती नदी, हाथी, दो शिविर), युद्ध (वर्षा, बाण, हाथी, कीचड़ में फँसे रथ), घायल पुरु का बंदी बनाया जाना, और वह प्रसिद्ध संवाद — जो इस दृश्य का सार है।

नमूना उत्तर — अंतिम दृश्य:

एलेक्जेंडर (घोड़े से उतरते हुए): तुम तब तक लड़ते रहे जब तक तुम्हारे अपने हाथी न गिर गए। बताओ — तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए?
पुरु (घायल, तनकर खड़े): एक राजा की तरह।
एलेक्जेंडर: बस इतना ही? कुछ और माँगो।
पुरु: और कुछ है ही नहीं। इन्हीं शब्दों में सब कुछ आ गया।
एलेक्जेंडर (क्षणभर रुककर, सेनापतियों से): इसने आज अपना राज्य खोया नहीं, बचा लिया है। यह पहले की भाँति शासन करेगा — और मेरे क्षत्रप के रूप में करेगा।
सूत्रधार: इस प्रकार जो रणभूमि में हारा, उसका सिंहासन बचा रहा; और जो जीता, वह तीन वर्ष के भीतर बेबीलोन में, बत्तीस वर्ष की आयु में, चल बसा।
सुझाव: एक विद्यार्थी को मंच के एक ओर ग्रीक इतिहासकार और दूसरे को देखते हुए स्थानीय ग्रामवासी की भूमिका दीजिए। दो सूत्रधार, दो दृष्टिकोण — इतिहास इसी प्रकार पढ़ाया जाना चाहिए।
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