अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
साम्राज्य विस्तृत भूभागों में फैले हुए होते थे, जिनमें अनेक प्रकार की भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियों वाले जन रहते थे। आपके विचार में सभी लोग सौहार्दपूर्वक रहें, यह सम्राटों ने कैसे सुनिश्चित किया होगा? समूह में विचार-विमर्श करें एवं कक्षा में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर

मुख्यतः हस्तक्षेप न करके — और लोगों को असंतोष के स्थान पर निष्ठा के कारण देकर।

समूह-चर्चा के लिए बिंदु, जिनमें से प्रत्येक का आधार इसी अध्याय में है —

  • स्थानीय शासकों को बने रहने दिया। “सामान्यतः सम्राट स्थानीय राजाओं या प्रमुखों को अपने प्रति निष्ठा तथा भेंट के बदले अपने क्षेत्रों का प्रशासन करने की अनुमति देते थे।” प्रजा का अपना राजा, अपनी भाषा और अपनी परंपराएँ बनी रहीं।
  • समुदायों को स्वशासन की छूट दी। श्रेणियों को अपने आंतरिक नियम बनाने की स्वतंत्रता थी और राजा हस्तक्षेप नहीं करता था। गाँवों की अपनी समितियाँ और परिषदें थीं।
  • सभी संप्रदायों के साथ समान व्यवहार। अशोक ने सभी संप्रदायों को एक-दूसरे की उचित शिक्षाओं को स्वीकार करने और उनका अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया और धम्माधिकारी नियुक्त किए, जो बौद्ध संघ, ब्राह्मणों, आजीवकों, जैनियों तथा अन्य संप्रदायों के बीच कार्य करते थे।
  • प्रजा की अपनी भाषा में बात की। शिलालेख प्राकृत में — जनसामान्य की भाषा में — और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण थे, न कि किसी दरबारी भाषा में।
  • केवल आदेश नहीं, कल्याण भी दिया। मुख्य मार्गों पर विश्रामगृह और कुएँ, फलदार और छायादार वृक्ष, मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा, अकाल के विरुद्ध अन्न-भंडार।
  • अधिकारियों को निष्पक्ष रखा। अशोक ने नगर न्यायाध्यक्षों से कहा — “सब मनुष्य मेरी संतान के समान हैं” — और प्रत्येक पाँचवें वर्ष एक नम्र महामात्र भेजने की व्यवस्था की।
  • मार्ग और व्यापार खुले रखे। व्यापार ने दूर-दूर के लोगों, वस्तुओं और विचारों को मिलाया, और साझी समृद्धि सबसे सस्ता सौहार्द है।
ऐसा क्यों: जिस भूभाग की सीमा तक पहुँचने में घोड़े पर लगभग दो मास लगते हों, उस पर केवल बल से शासन असंभव है। इसलिए सफल साम्राज्यों ने सौहार्द स्वायत्तता और कल्याण से खरीदा और बल को अंतिम उपाय के रूप में रखा।
प्र2.
एक विशाल साम्राज्य का संचालन करना अनेक प्रकार की कठिनाइयों से भरा होता है, फिर भी कोई राजा अपना राज्य बढ़ाकर सम्राट क्यों बनना चाहता होगा? नीचे कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, आप चाहें तो इसमें और भी उत्तर जोड़ सकते हैं। ‘संपूर्ण विश्व पर शासन’ करने की महत्वाकांक्षा अर्थात् एक बड़े प्रदेश को नियंत्रण में रखना एक ऐसा रूपक है, जिससे संकेत मिलता है कि वह विशाल क्षेत्र पर अधिकार करना चाहता था तथा यह सुनिश्चित करना चाहता था कि भावी पीढ़ियाँ उन्हें याद रखेंगी; एक विशाल भू-प्रदेश को अपने अधीन कर, वहाँ के संसाधनों का प्रयोग कर अपनी आर्थिक एवं सैन्य शक्ति बढ़ाने की इच्छा; स्वयं एवं अपने साम्राज्य के लिए महान संपदा प्राप्त करने की उत्कंठा।
उत्तर

पुस्तक तीन कारण देती है — यश, संसाधन और संपदा। कुछ और कारण, जिनका आधार भी इसी अध्याय में है —

  1. सुरक्षा। जो पड़ोसी आज परेशान करता है, वह कल आक्रमण करेगा। इरा के काका उस “पड़ोसी राज्य के विरुद्ध” जा रहे हैं “जो हमें निरंतर संकट में डालता है”। शत्रु पड़ोसी को जीतकर खतरनाक सीमा सुरक्षित भीतरी क्षेत्र बन जाती है।
  2. व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण। चित्र 5.4.4 कहता है कि शासक नदियों और व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण चाहते थे, क्योंकि इससे मूल्यवान संसाधन और व्यापार से कर-राजस्व दोनों मिलते थे।
  3. सामरिक संसाधनों पर अधिकार। लौह अयस्क, हाथी, इमारती लकड़ी, खानें — सेना इन्हीं से बनती है।
  4. अस्तित्व की विवशता। चित्र 5.4.5 — जब अनेक लघु राज्य प्रभुत्व के लिए लड़ते हों, तब प्रबल सैन्य बल और अधिशेष संसाधन वाला राज्य स्वयं अधिपति बन जाता है। जो नहीं बढ़ता, उसे कोई और निगल लेता है।
  5. निरंतर युद्ध का अंत। सुव्यवस्थित साम्राज्य छोटे राज्यों की आपसी लड़ाई रोक सकता है और अधिक समृद्धि ला सकता है।
  6. प्रतिष्ठा और उपाधियाँ। सम्राज् या राजाधिराज कहलाना स्वयं में एक उपलब्धि थी — और करद राजा भेंट, हाथी तथा निष्ठा लेकर आते थे।
  7. किसी विचार का प्रसार। अशोक ने अपने साम्राज्य की पहुँच का उपयोग बुद्ध के संदेश को श्रीलंका, थाईलैंड और मध्य एशिया तक पहुँचाने में किया।
सुझाव: कक्षा में अपना कारण जोड़ते समय उसे अध्याय पर कसिए — क्या आप कोई वाक्य, चित्र-शीर्षक या शिलालेख दिखा सकते हैं जो उसे प्रमाणित करे? इतिहासकार ठीक इसी प्रकार तर्क करता है।
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