प्र1.
साम्राज्य विस्तृत भूभागों में फैले हुए होते थे, जिनमें अनेक प्रकार की भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियों वाले जन रहते थे। आपके विचार में सभी लोग सौहार्दपूर्वक रहें, यह सम्राटों ने कैसे सुनिश्चित किया होगा? समूह में विचार-विमर्श करें एवं कक्षा में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
मुख्यतः हस्तक्षेप न करके — और लोगों को असंतोष के स्थान पर निष्ठा के कारण देकर।
समूह-चर्चा के लिए बिंदु, जिनमें से प्रत्येक का आधार इसी अध्याय में है —
- स्थानीय शासकों को बने रहने दिया। “सामान्यतः सम्राट स्थानीय राजाओं या प्रमुखों को अपने प्रति निष्ठा तथा भेंट के बदले अपने क्षेत्रों का प्रशासन करने की अनुमति देते थे।” प्रजा का अपना राजा, अपनी भाषा और अपनी परंपराएँ बनी रहीं।
- समुदायों को स्वशासन की छूट दी। श्रेणियों को अपने आंतरिक नियम बनाने की स्वतंत्रता थी और राजा हस्तक्षेप नहीं करता था। गाँवों की अपनी समितियाँ और परिषदें थीं।
- सभी संप्रदायों के साथ समान व्यवहार। अशोक ने सभी संप्रदायों को एक-दूसरे की उचित शिक्षाओं को स्वीकार करने और उनका अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया और धम्माधिकारी नियुक्त किए, जो बौद्ध संघ, ब्राह्मणों, आजीवकों, जैनियों तथा अन्य संप्रदायों के बीच कार्य करते थे।
- प्रजा की अपनी भाषा में बात की। शिलालेख प्राकृत में — जनसामान्य की भाषा में — और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण थे, न कि किसी दरबारी भाषा में।
- केवल आदेश नहीं, कल्याण भी दिया। मुख्य मार्गों पर विश्रामगृह और कुएँ, फलदार और छायादार वृक्ष, मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा, अकाल के विरुद्ध अन्न-भंडार।
- अधिकारियों को निष्पक्ष रखा। अशोक ने नगर न्यायाध्यक्षों से कहा — “सब मनुष्य मेरी संतान के समान हैं” — और प्रत्येक पाँचवें वर्ष एक नम्र महामात्र भेजने की व्यवस्था की।
- मार्ग और व्यापार खुले रखे। व्यापार ने दूर-दूर के लोगों, वस्तुओं और विचारों को मिलाया, और साझी समृद्धि सबसे सस्ता सौहार्द है।
ऐसा क्यों: जिस भूभाग की सीमा तक पहुँचने में घोड़े पर लगभग दो मास लगते हों, उस पर केवल बल से शासन असंभव है। इसलिए सफल साम्राज्यों ने सौहार्द स्वायत्तता और कल्याण से खरीदा और बल को अंतिम उपाय के रूप में रखा।