साम्राज्य की छह विशेषताएँ, ठीक वैसे ही जैसे अध्याय ने पृष्ठ 88 पर दी हैं, जहाँ सम्राट अपने करद क्षेत्रों और राजाओं पर केंद्रीय सत्ता का प्रयोग करता है —
| क्रम | विशेषता | इसमें क्या सम्मिलित है |
|---|---|---|
| 01 | सेना | करद राज्यों को नियंत्रण में रखने, साम्राज्य का विस्तार करने अथवा बाहरी आक्रमण से रक्षा हेतु सेना रखना |
| 02 | प्रशासन | क्षेत्रों के प्रबंधन, कर-संग्रह तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों सहित प्रशासन बनाना और चलाना |
| 03 | कानून और मुद्रा | कानून बनाना, मुद्रा तथा माप-तौल जारी करना, व्यापार को नियंत्रित करना |
| 04 | संसाधन | खानों, वन एवं कृषि-उपज तथा जनशक्ति तक पहुँच को नियंत्रित और नियमित करना |
| 05 | संस्कृति और विद्या | कला, साहित्य, धर्म, विचारधाराओं तथा विद्या-केंद्रों को प्रोत्साहित करना |
| 06 | संचार | प्रशासन, व्यापार और लोक-कल्याण हेतु सड़कों, नदी व समुद्री मार्गों तथा अन्य अवसंरचना का संचार तंत्र बनाए रखना |
साम्राज्य राज्य से किस प्रकार भिन्न है:
| राज्य | साम्राज्य | |
|---|---|---|
| विस्तार | एक भूभाग, प्रायः एक ही जन-समूह का | अनेक भूभाग; सीमा तक पहुँचने में घोड़े पर लगभग दो मास |
| संरचना | राजा सीधे अपनी प्रजा पर शासन करता है | सम्राट अन्य राजाओं पर शासन करता है, जो करद बन जाते हैं |
| उपाधि | राजा | सम्राज्, अधिराज, राजाधिराज — ‘राजाओं का राजा’ |
| आय | अपनी प्रजा से कर | कर तथा भेंट — स्वर्ण, अन्न, पशु, हाथी — करद राजाओं से |
| जन | प्रायः एक ही भाषा और परंपरा | एक ही सत्ता के अधीन अनेक भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ |
| निर्माण | प्रायः उत्तराधिकार से | प्रायः युद्ध, गठबंधन और पड़ोसियों की अधीनता से |
| स्थायित्व | तुलनात्मक रूप से स्थिर और सुगठित | दुर्बल — दूरस्थ क्षेत्र सबसे पहले अलग होते हैं |