प्र1.
फारसी और ग्रीक साम्राज्यों में प्रांतों के शासक क्षत्रप थे, जिन्हें सम्राट (जैसे – एलेक्जेंडर) ने सुदूर प्रदेशों का प्रबंधन करने के लिए पीछे छोड़ दिया था। मात्र अधिकारी होने के बावजूद इन क्षत्रपों के पास महत्वपूर्ण शक्ति और स्वतंत्रता थी। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि उनके लिए इतनी शक्ति का प्रयोग करना कैसे संभव था?
उत्तर
दूरी के कारण। क्षत्रप उस प्रांत का शासक होता था जो सम्राट से सप्ताहों या महीनों की यात्रा दूर था, और प्राचीन विश्व में दूरी का अर्थ था — कागज़ पर पद जो भी हो, व्यवहार में स्वतंत्रता।
| कारण | व्यवहार में इसका अर्थ |
|---|---|
| तीव्र संचार का अभाव | आदेश और प्रतिवेदन घोड़े की गति से चलते थे। क्षत्रप अनुमति की प्रतीक्षा नहीं कर सकता था, इसलिए स्वयं निर्णय लेना उसकी विवशता भी थी और शक्ति भी। |
| स्थानीय सेना उसके पास थी | सैनिक दूरस्थ सम्राट के नहीं, उसी के साथ रहते थे। जिसके पास सेना है, वास्तविक शक्ति उसी के पास है। |
| कर वही एकत्र करता था | राजस्व राजधानी पहुँचने से पहले उसके हाथों से गुज़रता था। धन पर नियंत्रण अर्थात् सब पर नियंत्रण। |
| स्थानीय अधिकारी वही नियुक्त करता था | प्रांत चलाने वाले लोग अपने पद के लिए सम्राट के नहीं, उसके ऋणी थे। |
| सम्राट जाँच नहीं कर पाता था | महीनों-वर्षों तक कोई निरीक्षण नहीं — और नए अभियानों में व्यस्त सम्राट का ध्यान कहीं और रहता था। |
| स्थानीय शासक उसी से व्यवहार करते थे | एलेक्जेंडर द्वारा क्षत्रप बनाए गए पुरु अपने क्षेत्र के वास्तविक राजा बने रहे। जनता उसी चेहरे को मानती है जो सामने हो। |
यह क्यों महत्वपूर्ण है: अध्याय के अंत में यही दुर्बलता लौटकर आती है। बेबीलोन में एलेक्जेंडर की मृत्यु के बाद “उसका विशाल साम्राज्य शीघ्र ही उसके सेनापतियों और क्षत्रपों के बीच विभाजित हो गया, जिन्होंने अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए।” जो अधिकारी साम्राज्य को जोड़े रखते थे, वही उसे तोड़ने की सबसे अच्छी स्थिति में भी थे। इसी समस्या का अशोक का उत्तर था — प्रत्येक पाँचवें वर्ष निरीक्षण हेतु महामात्र भेजना।