प्र1.
उपर्युक्त शिल्प-पट्टिका का सूक्ष्म अवलोकन करें। आप इनमें कितने प्रकार के शस्त्रों की पहचान कर सकते हैं? आपको लोहे के कौन-कौन से उपयोग दिखाई देते हैं?
उत्तर
ध्यान से देखने पर लगभग पाँच-छह प्रकार के शस्त्र तथा रक्षा-सामग्री पहचानी जा सकती है।
पट्टिका में दिखाई देने वाले शस्त्र और साज-सामान:
- लंबे भाले / बरछे — पैदल सैनिकों की भीड़ में सबसे अधिक; कई कंधों पर तिरछे रखे हैं।
- तलवारें — छोटी, चौड़ी फलक वाली, पैदल सैनिकों और घुड़सवारों दोनों के पास।
- धनुष-बाण — घिरे हुए नगर के आस-पास और सैनिकों की पंक्तियों में धनुर्धर दिखते हैं।
- ढालें — बाएँ हाथ पर आयताकार और गोलाकार ढालें।
- फरसे / अंकुशाकार शस्त्र — नगर-द्वार के पास कुछ आकृतियों के हाथों में।
- अंकुश — हाथियों पर बैठे महावतों के हाथ में; शत्रु का शस्त्र नहीं, पर युद्ध की अनिवार्य सामग्री।
- शिरस्त्राण (हेलमेट) तथा हाथियों-घोड़ों का साज।
लोहे के दिखाई देने वाले उपयोग:
| पट्टिका की वस्तु | लोहे का उपयोग किसमें |
|---|---|
| भाले की नोक, तलवार का फलक, बाण के फल, फरसे की धार | शस्त्र — काँसे से हल्के और तेज, इसलिए सैनिक अधिक देर तक चला सकते थे |
| ढाल की धार और मध्य-चक्र, शिरस्त्राण, कवच के जोड़ | रक्षा-साधन |
| रथ के पहियों की हाल, धुरी, कीलें और पट्टियाँ | वाहन और परिवहन |
| अश्वों की लगाम की कड़ियाँ, अंकुश, साज के छल्ले | पशु-संचालन |
| नगर-द्वार, दरवाज़ों की पट्टियाँ, परकोटे, घेराबंदी की सामग्री | निर्माण और दुर्गीकरण |
ऐसा क्यों: इससे पिछला पृष्ठ मगध के विषय में यही कहता है। निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों के लौह अयस्क ने मगध को एक साथ दो वस्तुएँ दीं — लोहे के हल, जिनसे फसल बढ़ी, और हल्के, तेज लोहे के शस्त्र, जिनसे सेना सशक्त हुई। कथा के आरंभ में इरा के पिता लोहार हैं, जिन्होंने “कई तलवारों को गढ़ने में सहायता” की है। अधिशेष अन्न और लोहे के शस्त्र — यही साम्राज्य का सूत्र है।