अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपनी कक्षा में एक सामूहिक चर्चा आयोजित करें और कौटिल्य के साम्राज्य के प्रति विचारों की विशेषताओं की तुलना आधुनिक राष्ट्र से करें।
उत्तर

कौटिल्य के सप्तांग — राज्य के सात अंगों — को आधुनिक राष्ट्र के समकक्ष रखिए। समानता चौंकाने वाली है।

सप्तांग (चित्र 5.15)तब इसका अर्थआज भारत जैसे राष्ट्र मेंसमान या भिन्न?
स्वामी (राजा)राज्य का सर्वोच्च शासकराष्ट्रपति (राज्याध्यक्ष) और प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) — परंतु निर्वाचित और संविधान से बँधे हुएभिन्न — शक्ति अब जन्म से नहीं, जनता से आती है
अमात्य (मंत्री, उच्च अधिकारी)राजा के परामर्शदाता और प्रशासकमंत्रिपरिषद और सिविल सेवाएँबहुत समान
जनपद (भूभाग और जनसंख्या)भूमि तथा उस पर बसे लोगराज्य-क्षेत्र और नागरिक — हर राष्ट्र की दो मूल पहचानलगभग समान
दुर्ग (दुर्गयुक्त नगर)रक्षा हेतु किले और परकोटेदार नगरसीमा-सुरक्षा, रक्षा प्रतिष्ठान, सामरिक अवसंरचनाभाव वही, रूप नया
कोष (राजकोष)राज्य की संपदाकेंद्रीय बजट, कराधान, रिज़र्व बैंक, लोक-वित्तबहुत समान
दंड (सेना, विधि-व्यवस्था)सेना और दंड देने की शक्तिसशस्त्र बल, पुलिस और न्यायालयसमान, पर अब कानून शासक को भी बाँधता है
मित्र (सहयोगी)संधि से बँधे मित्र-राजाविदेश नीति, संधियाँ, संयुक्त राष्ट्र, व्यापारिक साझेदारियाँबहुत समान

जहाँ कौटिल्य आधुनिक लगते हैं: राज्य का उद्देश्य प्रजा का कल्याण; भ्रष्टाचार के विरुद्ध कानून और जनहित के विरुद्ध कार्यों के लिए दंड-विधान; नगर-नियोजन, कृषि, न्याय और अवसंरचना पर ध्यान; तथा स्थानीय संस्थाओं को स्वायत्त रूप से कार्य करने देना।

जहाँ आधुनिक राष्ट्र भिन्न है: राज्याध्यक्ष निर्वाचित होता है और हटाया जा सकता है; लिखित संविधान और मौलिक अधिकार हैं; न्यायपालिका स्वतंत्र है; कोई करद राजा नहीं होते; और नागरिक प्रजा नहीं, विधि के समक्ष समान हैं।

चर्चा चलाने का सुझाव: कक्षा को सात समूहों में बाँटिए, प्रत्येक को एक अंग। हर समूह पाँच मिनट में उसका आधुनिक समकक्ष और एक परिवर्तन बताए। इस तरह पूरा सप्तांग सम्मिलित होगा।
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