प्र1.
अपनी कक्षा में एक सामूहिक चर्चा आयोजित करें और कौटिल्य के साम्राज्य के प्रति विचारों की विशेषताओं की तुलना आधुनिक राष्ट्र से करें।
उत्तर
कौटिल्य के सप्तांग — राज्य के सात अंगों — को आधुनिक राष्ट्र के समकक्ष रखिए। समानता चौंकाने वाली है।
| सप्तांग (चित्र 5.15) | तब इसका अर्थ | आज भारत जैसे राष्ट्र में | समान या भिन्न? |
|---|---|---|---|
| स्वामी (राजा) | राज्य का सर्वोच्च शासक | राष्ट्रपति (राज्याध्यक्ष) और प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) — परंतु निर्वाचित और संविधान से बँधे हुए | भिन्न — शक्ति अब जन्म से नहीं, जनता से आती है |
| अमात्य (मंत्री, उच्च अधिकारी) | राजा के परामर्शदाता और प्रशासक | मंत्रिपरिषद और सिविल सेवाएँ | बहुत समान |
| जनपद (भूभाग और जनसंख्या) | भूमि तथा उस पर बसे लोग | राज्य-क्षेत्र और नागरिक — हर राष्ट्र की दो मूल पहचान | लगभग समान |
| दुर्ग (दुर्गयुक्त नगर) | रक्षा हेतु किले और परकोटेदार नगर | सीमा-सुरक्षा, रक्षा प्रतिष्ठान, सामरिक अवसंरचना | भाव वही, रूप नया |
| कोष (राजकोष) | राज्य की संपदा | केंद्रीय बजट, कराधान, रिज़र्व बैंक, लोक-वित्त | बहुत समान |
| दंड (सेना, विधि-व्यवस्था) | सेना और दंड देने की शक्ति | सशस्त्र बल, पुलिस और न्यायालय | समान, पर अब कानून शासक को भी बाँधता है |
| मित्र (सहयोगी) | संधि से बँधे मित्र-राजा | विदेश नीति, संधियाँ, संयुक्त राष्ट्र, व्यापारिक साझेदारियाँ | बहुत समान |
जहाँ कौटिल्य आधुनिक लगते हैं: राज्य का उद्देश्य प्रजा का कल्याण; भ्रष्टाचार के विरुद्ध कानून और जनहित के विरुद्ध कार्यों के लिए दंड-विधान; नगर-नियोजन, कृषि, न्याय और अवसंरचना पर ध्यान; तथा स्थानीय संस्थाओं को स्वायत्त रूप से कार्य करने देना।
जहाँ आधुनिक राष्ट्र भिन्न है: राज्याध्यक्ष निर्वाचित होता है और हटाया जा सकता है; लिखित संविधान और मौलिक अधिकार हैं; न्यायपालिका स्वतंत्र है; कोई करद राजा नहीं होते; और नागरिक प्रजा नहीं, विधि के समक्ष समान हैं।
चर्चा चलाने का सुझाव: कक्षा को सात समूहों में बाँटिए, प्रत्येक को एक अंग। हर समूह पाँच मिनट में उसका आधुनिक समकक्ष और एक परिवर्तन बताए। इस तरह पूरा सप्तांग सम्मिलित होगा।