कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अशोक ने अपने शिलालेखों में कलिंग युद्ध का उल्लेख किया है। वे चाहते तो इसका उल्लेख न करके भविष्य की पीढ़ियों के समक्ष स्वयं को एक शांतिपूर्ण, परोपकारी राजा के रूप में प्रस्तुत कर सकते थे। आपके विचार में उन्होंने इस विनाशकारी युद्ध का उल्लेख अपने शिलालेखों में क्यों किया?
उत्तर

क्योंकि यह स्वीकारोक्ति ही उनका संदेश थी। युद्ध के बिना हृदय-परिवर्तन नहीं — और हृदय-परिवर्तन ही वह पाठ था जो अशोक पूरे साम्राज्य को पढ़ाना चाहते थे।

सबसे प्रबल कारण:

  1. पश्चात्ताप ही मूल बात है। “मैं सदा शांतिप्रिय था” कहने से कोई कुछ नहीं सीखता। “मैंने भयंकर युद्ध किया, मृत्यु और विनाश देखा, और हिंसा त्याग दी” कहने से प्रजा को धर्म का पालन करने का कारण मिलता है — यदि सम्राट बदल सकता है, तो कोई भी बदल सकता है।
  2. इससे नई नीति विश्वसनीय बनी। जिसने कभी युद्ध किया ही न हो, वह युद्ध त्यागने का दावा कैसे करता? उनका अतीत ही उनके परिवर्तन का प्रमाण बना।
  3. यह दूसरों के लिए चेतावनी थी। पड़ोसी राज्यों और अपने ही अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से बताया जा रहा था कि युद्ध की वास्तविक कीमत क्या है।
  4. यह उनकी आत्म-छवि से मेल खाता है। वे स्वयं को पियदसि — ‘दूसरों के प्रति दयालुता से व्यवहार करने वाला’ — कहते थे और अधिकारियों से कहा, “सब मनुष्य मेरी संतान के समान हैं।” जिस पिता ने संतान को कष्ट दिया हो, वह स्वीकार करेगा।
  5. सत्य धर्म का अंग है। धर्म में “कर्तव्य का सत्यनिष्ठा से निर्वहन” सम्मिलित है। युद्ध छिपाना उसी शिक्षा के विरुद्ध होता जो वे चट्टान पर उत्कीर्ण करवा रहे थे।
इतिहासकारों के लिए इसका महत्व: प्राचीन इतिहास के उन विरल क्षणों में से एक, जब कोई शासक अपनी विफलता दर्ज करता है। राजा सामान्यतः विजय अंकित कराते हैं। अध्याय यह भी उचित ही कहता है कि “हमें अशोक के सभी अभिलेखों को शाब्दिक रूप से स्वीकारने की आवश्यकता नहीं” — शिलालेख अंततः शासक का अपने विषय में कथन है। परंतु कलिंग वाला कथन ही एकमात्र ऐसा है जो उन्हें कुछ खर्च करवाता है, और इसीलिए उसका भार अधिक है।
क्या आप जानते हैं? ओडिशा में धौली के पास — जो कभी कलिंग था — अशोक का एक शिलालेख चट्टान पर उत्कीर्ण है, और उसके पास जीवंत चट्टान से तराशा गया आदमकद हाथी खड़ा है (चित्र 5.27, पृष्ठ 111), जो बुद्ध का प्रतीक है — बुद्धिमान, शक्तिशाली, धैर्यवान और शांत।
क्या यह उपयोगी रहा?