प्र1.
नीचे दर्शाए गए सिक्कों के अलग-अलग चिह्नों पर ध्यान दीजिए। इन चिह्नों का अर्थ क्या हो सकता है, क्या आप अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर
चित्र 5.29.2 के नीचे बने तीन चिह्नों को देखिए। ये सिक्के पर आहत (ठप्पा लगाए गए) चिह्न हैं, जिन्हें स्पष्ट रूप से दोबारा बनाया गया है ताकि आप उनका अध्ययन कर सकें।
| सिक्के का चिह्न | वह दिखता कैसा है | उसका संभावित अर्थ |
|---|---|---|
| किरणों वाला चक्र / सूर्य | छोटे केंद्र से निकलती अनेक किरणों वाला वृत्त | सूर्य — प्रकाश, ऊर्जा, राजत्व — अथवा चक्र, जो सत्ता और धर्म का प्रतीक है। मौर्य सिक्कों पर यह सबसे सामान्य चिह्न है। |
| छह भुजाओं वाला चिह्न | छोटा वृत्त, जिससे छह भुजाएँ निकलती हैं और उनके सिरे बाण जैसे हैं | इसे प्रायः षडर चक्र कहते हैं — छह अरों वाला चक्र। संभवतः राजकीय या साम्राज्यिक अधिकार का चिह्न, या किसी विशेष टकसाल अथवा अधिकारी का। |
| ऊपर-नीचे जुड़े अंडाकार / वृषभ-चिह्न | दो गोलाकार आकृतियाँ एक के ऊपर एक, बीच में एक रेखा | इसे प्रायः ‘अर्धचंद्र सहित पर्वत’ या टॉरीन चिह्न पढ़ा जाता है — पर्वत, नदी अथवा कोई मांगलिक संकेत; यह अशोक के सिक्के के दोनों ओर मिलता है, अतः यह जारीकर्ता का चिह्न भी हो सकता है। |
सामान्यतः इन चिह्नों के विषय में क्या माना जाता है:
- प्रकृति और भूमि — सूर्य, पर्वत, वेदिका में घिरा वृक्ष, नदियाँ, हाथी और बैल जैसे पशु।
- सत्ता — चक्र, जो शासक की प्रभुसत्ता का प्रतीक है।
- मंगलकामना — ऐसे चिह्न जिन्हें धारक के लिए शुभ माना जाता था।
- गारंटी — प्रत्येक ठप्पा इस बात की पुष्टि था कि चाँदी के उस टुकड़े का भार और शुद्धता जाँच ली गई है।
एक ही सिक्के पर अनेक चिह्न क्यों? ये आहत (पंचमार्क) सिक्के हैं — इन पर चिह्न एक ही ठप्पे से एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग ठोके जाते थे, प्रायः भिन्न-भिन्न अधिकारियों द्वारा — राजकीय टकसाल, क्षेत्रीय अधिकारी, कभी कोई श्रेणी या व्यापारी जिसने सिक्का परखा हो। हर अतिरिक्त ठप्पा एक और हस्ताक्षर था कि ‘यह चाँदी खरी है’। इसीलिए संग्रह (चित्र 5.29.1) के सिक्के सुडौल गोल नहीं, अनियमित चौकोर हैं।
इतिहासकार की ईमानदारी: आज कोई भी इन चिह्नों को निश्चितता से नहीं पढ़ सकता — कोई प्राचीन ग्रंथ इनकी व्याख्या नहीं करता। सर्वोत्तम उत्तर वह है जो संभावित अर्थ बताए और यह भी स्वीकार करे कि विद्वानों में अब भी मतभेद है।