प्र1.
इन नवीन राजकीय इकाइयों में सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद थे— मगध, कोसल, वत्स तथा अवंति। मानचित्र को देखकर क्या आप इनकी राजधानियों की पहचान कर सकते हैं? साथ ही, इनमें से कितने नगरों की पहचान वर्तमान भारतीय नगरों से की जा सकती है?
उत्तर
चित्र 4.3 में लाल तारे इन राजधानियों को दर्शाते हैं। इन चारों की पहचान आज के भारतीय नगरों से होती है — चारों ही।
| महाजनपद | मानचित्र में राजधानी | आज का नगर | आज का राज्य |
|---|---|---|---|
| मगध | राजगृह | राजगीर | बिहार |
| कोसल | श्रावस्ती | श्रावस्ती (सहेत-महेत) | उत्तर प्रदेश |
| वत्स | कौशांबी | कोसम, प्रयागराज के समीप | उत्तर प्रदेश |
| अवंति | उज्जयिनी | उज्जैन | मध्य प्रदेश |
अब यही कार्य शेष मानचित्र के लिए कीजिए — असली आश्चर्य मिलानों की संख्या में है:
| महाजनपद | राजधानी (चित्र 4.3) | आज |
|---|---|---|
| अंग | चंपा | चंपापुर/चंपानगर, भागलपुर के समीप, बिहार |
| वृज्जि (वज्जि) | वैशाली | वैशाली, बिहार |
| मल्ल | कुशीनारा | कुशीनगर, उत्तर प्रदेश |
| काशी | वाराणसी | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| कुरू | इन्द्रप्रस्थ | दिल्ली |
| पांचाल | अहिच्छत्र | रामनगर, बरेली जिला, उत्तर प्रदेश |
| शूरसेन | मथुरा | मथुरा, उत्तर प्रदेश |
| मत्स्य | विराट | बैराठ, राजस्थान |
| चेदि | त्रिपुरी | तेवर, जबलपुर के समीप, मध्य प्रदेश |
| गांधार | तक्षशिला, पुष्पकलावती | टैक्सिला तथा चारसद्दा, आज के पाकिस्तान में |
| कंबोज | (राजधानी अंकित नहीं) | सुदूर उत्तर-पश्चिम का क्षेत्र |
| अश्मक | (राजधानी अंकित नहीं) | गोदावरी के किनारे, आज के महाराष्ट्र/तेलंगाना में |
इतने नगर आज भी क्यों बचे हैं: राजधानियाँ वहीं बसाई जाती थीं जहाँ नगर टिक सके — नदी के किनारे, व्यापारिक मार्ग पर, उपजाऊ प्रदेश में, सुरक्षित भूमि पर। ये सुविधाएँ समाप्त नहीं हुईं, अतः लोगों ने वे स्थान कभी नहीं छोड़े। अध्याय के शब्दों में — ये ‘आधुनिक’ नगर वस्तुतः 2500 वर्ष प्राचीन हैं।
ध्यान दें: हिंदी संस्करण का मानचित्र काशी तथा उसकी राजधानी वाराणसी को भी अंकित करता है; अंग्रेजी संस्करण के उसी मानचित्र में यह नारंगी क्षेत्र बिना नाम के छोड़ दिया गया है।