अन्वेषण अध्याय 4 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इन नवीन राजकीय इकाइयों में सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद थे— मगध, कोसल, वत्स तथा अवंति। मानचित्र को देखकर क्या आप इनकी राजधानियों की पहचान कर सकते हैं? साथ ही, इनमें से कितने नगरों की पहचान वर्तमान भारतीय नगरों से की जा सकती है?
उत्तर

चित्र 4.3 में लाल तारे इन राजधानियों को दर्शाते हैं। इन चारों की पहचान आज के भारतीय नगरों से होती है — चारों ही

महाजनपदमानचित्र में राजधानीआज का नगरआज का राज्य
मगधराजगृहराजगीरबिहार
कोसलश्रावस्तीश्रावस्ती (सहेत-महेत)उत्तर प्रदेश
वत्सकौशांबीकोसम, प्रयागराज के समीपउत्तर प्रदेश
अवंतिउज्जयिनीउज्जैनमध्य प्रदेश

अब यही कार्य शेष मानचित्र के लिए कीजिए — असली आश्चर्य मिलानों की संख्या में है:

महाजनपदराजधानी (चित्र 4.3)आज
अंगचंपाचंपापुर/चंपानगर, भागलपुर के समीप, बिहार
वृज्जि (वज्जि)वैशालीवैशाली, बिहार
मल्लकुशीनाराकुशीनगर, उत्तर प्रदेश
काशीवाराणसीवाराणसी, उत्तर प्रदेश
कुरूइन्द्रप्रस्थदिल्ली
पांचालअहिच्छत्ररामनगर, बरेली जिला, उत्तर प्रदेश
शूरसेनमथुरामथुरा, उत्तर प्रदेश
मत्स्यविराटबैराठ, राजस्थान
चेदित्रिपुरीतेवर, जबलपुर के समीप, मध्य प्रदेश
गांधारतक्षशिला, पुष्पकलावतीटैक्सिला तथा चारसद्दा, आज के पाकिस्तान में
कंबोज(राजधानी अंकित नहीं)सुदूर उत्तर-पश्चिम का क्षेत्र
अश्मक(राजधानी अंकित नहीं)गोदावरी के किनारे, आज के महाराष्ट्र/तेलंगाना में
इतने नगर आज भी क्यों बचे हैं: राजधानियाँ वहीं बसाई जाती थीं जहाँ नगर टिक सके — नदी के किनारे, व्यापारिक मार्ग पर, उपजाऊ प्रदेश में, सुरक्षित भूमि पर। ये सुविधाएँ समाप्त नहीं हुईं, अतः लोगों ने वे स्थान कभी नहीं छोड़े। अध्याय के शब्दों में — ये ‘आधुनिक’ नगर वस्तुतः 2500 वर्ष प्राचीन हैं।
ध्यान दें: हिंदी संस्करण का मानचित्र काशी तथा उसकी राजधानी वाराणसी को भी अंकित करता है; अंग्रेजी संस्करण के उसी मानचित्र में यह नारंगी क्षेत्र बिना नाम के छोड़ दिया गया है।
प्र2.
इस मानचित्र की तुलना कक्षा 6 के अध्याय ‘भारत अर्थात इंडिया’ में महाभारत में उल्लिखित प्रदेशों के मानचित्र (चित्र 5.4) से कीजिए और उन नामों को सूचीबद्ध कीजिए जो दोनों में समान हैं। आपके अनुसार यह समानता क्या संकेत करती है?
उत्तर

दोनों मानचित्रों में समान नाम (इस अध्याय का चित्र 4.3 तथा कक्षा 6 का चित्र 5.4):

क्र.दोनों में समान नामस्थिति
1गांधारउत्तर-पश्चिम
2कंबोजसुदूर उत्तर-पश्चिम
3मत्स्यआज का पूर्वी राजस्थान
4शूरसेनमथुरा क्षेत्र
5पांचालऊपरी गंगा-यमुना दोआब
6चेदिमध्य भारत
7कोसलमध्य गंगा का मैदान
8काशीवाराणसी के आस-पास
9मगधदक्षिण बिहार
10अंगपूर्वी बिहार
11अवंतिमालवा
12अश्मकगोदावरी क्षेत्र

अर्थात 16 में से 12 महाजनपदों के नाम महाभारत की सूची में पहले से मिलते हैं। जो चार चित्र 5.4 में नहीं हैं, वे हैं — कुरू (यद्यपि कक्षा 6 के पाठ में कुरुक्षेत्र का उल्लेख है), वत्स, मल्ल तथा वृज्जि। दूसरी ओर चित्र 5.4 में विदेह, कलिंग, विदर्भ, सुराष्ट्र, केरल, चोल और पांड्य जैसे अनेक नाम हैं जो महाजनपद नहीं थे।

यह समानता क्या संकेत करती है — तीन निष्कर्ष:

  • नामों एवं भूभागों की निरंतरता। भारत के क्षेत्रीय नाम अत्यंत प्राचीन तथा आश्चर्यजनक रूप से स्थिर हैं। वही नाम महाकाव्य परंपरा से होते हुए प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. के राजनीतिक मानचित्र में आते हैं और कई तो आधुनिक भारत तक पहुँचते हैं — गांधार, काशी → वाराणसी, मगध → बिहार का मगध प्रमंडल, केरल → केरल।
  • महाभारत वास्तविक भूगोल सुरक्षित रखता है। वह इतिहास-ग्रंथ नहीं, महाकाव्य है; फिर भी जिस भूमि का वर्णन करता है वह लोगों की जानी-पहचानी भूमि थी। इसीलिए इतिहासकार उत्खनन के साथ-साथ उसमें आए क्षेत्रीय नामों को भी साक्ष्य मानते हैं।
  • परिवर्तन राजनीतिक था, सांस्कृतिक नहीं। दोनों मानचित्रों के बीच जो बदला वह इकाई का स्वरूप है — ढीले-ढाले प्रदेश और कुल अब किलेबंद राजधानी, सिक्कों और करों वाले संगठित राज्य बन गए। लोग और उनका स्थान-बोध वहीं बना रहा।
यह करके देखें: अपनी अभ्यास-पुस्तिका में दो स्तंभ बनाइए — ‘दोनों मानचित्रों में’ तथा ‘केवल एक मानचित्र में’ — और प्रत्येक नाम के आगे आज का राज्य लिखिए। अंत में आपके सामने भारत का एक पहचाना हुआ मानचित्र होगा।
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