चरण 1 — उद्धरण से कौटिल्य की अनुशंसाएँ निकालिए। पृष्ठ 67 पर दिया अर्थशास्त्र का यह अंश कुछ ही पंक्तियों में छह माँगें रखता है —
| कौटिल्य की माँग | उनके शब्द | राज्य को इसकी आवश्यकता क्यों |
|---|---|---|
| रक्षा | “राजधानी तथा सीमांत नगरों की दुर्गबंदी आवश्यक है” | जो राज्य अपनी सीमा और राजधानी की रक्षा न कर सके, वह टिकता नहीं |
| अन्न-सुरक्षा, अतिरिक्त सहित | “न केवल जनसामान्य का पोषण… अपितु आपदाओं के समय आगंतुकों का भी निर्वाह” | अकाल या बाढ़ में शरणार्थियों को खिलाने के लिए अन्न का अधिशेष |
| प्राकृतिक संसाधन | “कृषियोग्य क्षेत्र, खनिजयुक्त प्रदेश, काष्ठवन, गजवन तथा गोधन संपन्न चारागाह” | कृषि, धातु, निर्माण-सामग्री, युद्ध के हाथी, दूध तथा हल के पशु |
| वर्षा पर निर्भर न रहने वाला जल | “जल के लिए केवल वर्षा पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए” | नदियाँ, जलाशय और कूप राज्य को असफल मानसून में भी बचाते हैं |
| परिवहन | “सड़कें तथा जलमार्ग सुगम व सुव्यवस्थित होने चाहिए” | अन्न, वस्तुओं, राजस्व तथा सेना की आवाजाही |
| उत्पादक अर्थव्यवस्था | “विविध प्रकार की वस्तुओं से परिपूर्ण” | अनेक उत्पाद अर्थात व्यापार, कर तथा किसी एक के विफल होने पर भी टिकाव |
चरण 2 — चर्चा और ईमानदार निष्कर्ष। कक्षा को समूहों में बाँटिए, प्रत्येक समूह को एक पंक्ति दीजिए और उससे आज का समकक्ष खोजने को कहिए। प्रायः सभी समूह इसी निष्कर्ष पर पहुँचते हैं —
| कौटिल्य, लगभग 300 सा.सं.पू. | आज का भारत | समान या भिन्न? |
|---|---|---|
| राजधानी व सीमांत नगरों की दुर्गबंदी | सशस्त्र बल, सीमा चौकियाँ, तटीय एवं साइबर सुरक्षा | उद्देश्य वही, तकनीक नई |
| आपदा में बाहरी लोगों का भी पोषण | भारतीय खाद्य निगम का बफर स्टॉक, आपदा राहत | समान |
| खान, वन, चारागाह | खनिज एवं ऊर्जा संसाधन, वन तथा दुग्ध नीति | समान, साथ में नई चिंता — संधारणीयता |
| केवल वर्षा पर निर्भर न रहना | बाँध, नहरें, नलकूप, जल-संभर तथा वर्षाजल संचयन | समस्या वही, अनेक जिलों में आज भी अनसुलझी |
| सुगम सड़कें तथा जलमार्ग | राजमार्ग, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, अंतर्देशीय जलमार्ग | समान |
| विविध वस्तुओं वाली उत्पादक अर्थव्यवस्था | कृषि, उद्योग तथा सेवा क्षेत्र साथ-साथ | समान |
निष्कर्ष: सूची लगभग बिलकुल नहीं बदली — सुरक्षा, अन्न, जल, संसाधन, परिवहन और व्यापक अर्थव्यवस्था आज भी वही कसौटियाँ हैं जिन पर सरकार परखी जाती है। जो बदला है वह है निर्णय कौन लेता है और किसके लिए। कौटिल्य ऐसे राजा को परामर्श देते हैं जिसका राज्य उसकी अपनी संपत्ति है; आज वही कार्य निर्वाचित सरकार करती है, जो नागरिकों के प्रति उत्तरदायी है, संविधान के अधीन है, और जिसकी सूची में अधिकार तथा कल्याण (शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता) भी जुड़ चुके हैं — साथ ही पर्यावरणीय मूल्य भी, जिसे कौटिल्य को कभी तौलना नहीं पड़ा।