अन्वेषण अध्याय 6 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे भरहुत स्तूप की एक पट्टिका का चित्र है। दाहिने तरफ की दोनों आकृतियों को ध्यानपूर्वक देखिए। वे क्या कर रही हैं? क्या आप उनके व्यवसाय का अनुमान लगा सकते हैं? उनके परिधानों पर ध्यान दीजिए। यह हमें उनके बारे में क्या बता रहे हैं? पट्टिका में आपको जो अन्य विवरण दिखे, उन्हें सूचीबद्ध कर कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

वे क्या कर रही हैं। दाहिनी ओर की दोनों आकृतियाँ गतिशील मुद्रा में हैं — घुटने मुड़े हुए, शरीर आगे की ओर झुका हुआ, हाथ मुख के सामने उठे हुए और प्रत्येक के हाथ में कोई पतली वस्तु है। वे न लड़ रही हैं, न उनके पास शस्त्र हैं : वे पट्टिका के बीच रखी वस्तु के चारों ओर हो रहे उत्सव में सम्मिलित हैं — संभवतः वादक के रूप में। एक मुख से कोई वाद्य (शंख या तुरही) बजाता प्रतीत होता है और दूसरा लंबा वाद्य थामे हुए है।

उनका व्यवसाय। सबसे संभावित अनुमान है — राजदरबार या स्तूप के उत्सवों से जुड़े वादक अथवा कलाकार। (दूसरा अनुमान भी ठीक हो सकता है कि वे भेंट लेकर आते हुए सेवक या उपासक हैं — आप जो भी चुनें, अपना कारण अवश्य लिखिए।)

उनके परिधान, और वे हमें क्या बताते हैं। ध्यान से देखिए :

  • सलीके से लपेटी हुई बड़ी पगड़ी, जिसकी गाँठ एक ओर है।
  • बड़े गोल कर्णाभूषण, गले का हार, बाजूबंद और प्रत्येक कलाई में कई चूड़ियाँ
  • कमरबंद से बँधी छोटी धोती, ऊपरी शरीर अनावृत — गति के अनुकूल हल्के वस्त्र।

यह किसी निर्धन श्रमिक का पहनावा नहीं है। इन उत्कीर्णनों में साधारण श्रमजीवी इससे कहीं कम पहने दिखाए जाते हैं। अतः पट्टिका बताती है कि ये कुशल और सम्मानित लोग थे — इतने संपन्न कि आभूषण रख सकें, और इतने महत्वपूर्ण कि पवित्र शिल्प में स्थान पाएँ।

पट्टिका के अन्य विवरण (कक्षा में इन्हें सूचीबद्ध कीजिए) :

विवरणउस पर क्या कहा जाए
कमल-दलों से भरी बड़ी गोल पट्टिका (मेडलियन)भरहुत का सबसे आम अलंकरण कमल है; बीच में रखी वस्तु का सम्मान किया जा रहा है
मेडलियन पर झुकी मोटी माला या लतामाला उस वस्तु को पवित्र घोषित करती है — ठीक वैसे ही जैसे आज किसी चित्र पर माला चढ़ाई जाती है
दोनों ओर छोटे कमल-चक्रबार-बार दोहराए गए अलंकरण — शिल्पी ने पूरी योजना बनाकर काम किया था
पृष्ठभूमि में चट्टानों की परतेंपर्वत या पहाड़ी दिखाने की प्रचलित शैली
नीचे की पट्टी में मनकों की झालर और कमल-कलियाँ कलशों परवेदिका का निचला किनारा — यही झालर पूरे स्तूप के चारों ओर चलती है
यह महत्वपूर्ण क्यों : शुंगों ने अशोककालीन स्तूप में ये वेदिकाएँ और उत्कीर्ण शिल्प जोड़े। चूँकि इनमें साधारण जीवन दिखता है — वस्त्र, आभूषण, वाद्य, केश-सज्जा — ये हमारे लिए यह जानने के सर्वोत्तम स्रोत हैं कि दो हजार वर्ष पूर्व लोग कैसे दिखते थे।
स्वयं जाँचिए : पुस्तक को पास लाकर प्रत्येक आकृति के हाथ देखिए। यदि वाद्य स्पष्ट दिखे तो ठीक-ठीक वही लिखिए जो दिख रहा है — अच्छा इतिहास पहले यह बताता है कि साक्ष्य क्या दिखाता है, तब यह कि उसका अर्थ क्या है।
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