पट्टिका में क्या-क्या है :
- यह उत्कीर्ण पत्थर की एक पट्टिका है। बीच में कमल की बारीक पंखुड़ियों से भरा एक बड़ा गोल पदक है; उसके केंद्र में एक बड़े नुकीले पत्ते जैसी आकृति के भीतर एक नीची चौकी पर लिपटी हुई गठरी जैसी छोटी वस्तु रखी है।
- पदक के ऊपर माला जैसी एक मोटी पट्टी घूमती है और उसके दोनों ओर छोटे-छोटे पुष्प-चक्र बने हैं।
- सबसे नीचे कलियों और मनकों की दो पंक्तियों वाली किनार चलती है।
- दाहिनी ओर दो मानव-आकृतियाँ गतिशील मुद्रा में हैं — घुटने मुड़े हुए, शरीर मुड़ा हुआ, एक दूसरी से थोड़ा पीछे और ऊपर। प्रत्येक दोनों हाथ मुख तक उठाए हुए है और एक लंबी पतली वस्तु थामे है, जो कंधे के ऊपर से पीछे की ओर पतली होती जाती है।
- दोनों ने बड़ी लपेटी हुई पगड़ी, बड़े गोल कर्णाभूषण, गले का हार, बाजूबंद, प्रत्येक कलाई में कई चूड़ियाँ और कमर पर बँधा छोटा वस्त्र पहन रखा है; ऊपरी शरीर और पैर अनावृत हैं।
- उनके पीछे की पृष्ठभूमि चपटे पत्थर-खंडों के खुरदरे प्रारूप में तराशी गई है।
वे क्या कर रही हैं। दाहिनी ओर की दोनों आकृतियाँ गतिशील मुद्रा में हैं — घुटने मुड़े हुए, शरीर आगे की ओर झुका हुआ, हाथ मुख के सामने उठे हुए और प्रत्येक के हाथ में कोई पतली वस्तु है। वे न लड़ रही हैं, न उनके पास शस्त्र हैं : वे पट्टिका के बीच रखी वस्तु के चारों ओर हो रहे उत्सव में सम्मिलित हैं — संभवतः वादक के रूप में। एक मुख से कोई वाद्य (शंख या तुरही) बजाता प्रतीत होता है और दूसरा लंबा वाद्य थामे हुए है।
उनका व्यवसाय। सबसे संभावित अनुमान है — राजदरबार या स्तूप के उत्सवों से जुड़े वादक अथवा कलाकार। (दूसरा अनुमान भी ठीक हो सकता है कि वे भेंट लेकर आते हुए सेवक या उपासक हैं — आप जो भी चुनें, अपना कारण अवश्य लिखिए।)
उनके परिधान, और वे हमें क्या बताते हैं। ध्यान से देखिए :
- सलीके से लपेटी हुई बड़ी पगड़ी, जिसकी गाँठ एक ओर है।
- बड़े गोल कर्णाभूषण, गले का हार, बाजूबंद और प्रत्येक कलाई में कई चूड़ियाँ।
- कमरबंद से बँधी छोटी धोती, ऊपरी शरीर अनावृत — गति के अनुकूल हल्के वस्त्र।
यह किसी निर्धन श्रमिक का पहनावा नहीं है। इन उत्कीर्णनों में साधारण श्रमजीवी इससे कहीं कम पहने दिखाए जाते हैं। अतः पट्टिका बताती है कि ये कुशल और सम्मानित लोग थे — इतने संपन्न कि आभूषण रख सकें, और इतने महत्वपूर्ण कि पवित्र शिल्प में स्थान पाएँ।
पट्टिका के अन्य विवरण (कक्षा में इन्हें सूचीबद्ध कीजिए) :
| विवरण | उस पर क्या कहा जाए |
|---|---|
| कमल-दलों से भरी बड़ी गोल पट्टिका (मेडलियन) | भरहुत का सबसे आम अलंकरण कमल है; बीच में रखी वस्तु का सम्मान किया जा रहा है |
| मेडलियन पर झुकी मोटी माला या लता | माला उस वस्तु को पवित्र घोषित करती है — ठीक वैसे ही जैसे आज किसी चित्र पर माला चढ़ाई जाती है |
| दोनों ओर छोटे कमल-चक्र | बार-बार दोहराए गए अलंकरण — शिल्पी ने पूरी योजना बनाकर काम किया था |
| पृष्ठभूमि में चट्टानों की परतें | पर्वत या पहाड़ी दिखाने की प्रचलित शैली |
| नीचे की पट्टी में मनकों की झालर और कमल-कलियाँ कलशों पर | वेदिका का निचला किनारा — यही झालर पूरे स्तूप के चारों ओर चलती है |