कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
चित्र 6.6 के कोलाज में चित्रों को ध्यान से देखिए। कपड़ों, आभूषणों और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं पर अपने विचार लिखिए।
कोलाज के दस चित्र, पुस्तक में दिए गए क्रम से :
6.6.1 ग्रीक योद्धा वाला स्तंभ — पत्थर का एक ऊँचा स्तंभ, जिस पर उभरी हुई एक खड़ी आकृति उत्कीर्ण है।
6.6.2 पुरुष आकृति — मिट्टी (टेराकोटा) की एक लंबी पट्टिका पर एक खड़ी आकृति।
6.6.3 बालक को गोद में लिए स्त्री — टेराकोटा की टूटी पट्टिका; एक खड़ी स्त्री, कमर पर छोटा बालक।
6.6.4 पंखे के साथ स्त्री — अंडाकार टेराकोटा पट्टिका; हाथ में गोल पंखा लिए खड़ी स्त्री।
6.6.5 एक कलश — ऊँचा पात्र, जिस पर छोटी-छोटी ढली हुई आकृतियों की पंक्तियाँ हैं।
6.6.6 केश-आभूषणों सहित स्त्री-आकृति, टेराकोटा — टूटी पट्टिका, जिसमें विस्तृत केश-सज्जा वाला एक मुख दिखता है।
6.6.7 राजपरिवार — आयताकार टेराकोटा पट्टिका, जिसमें एक चौखट के भीतर दो आकृतियाँ साथ-साथ हैं।
6.6.8 सोने की पतली परत चढ़े काँसे के कंगन — दो सादे गोल कंगन, काली पृष्ठभूमि पर।
6.6.9 हाथीदाँत की कंघी — घुमावदार कंघी, जिसके दाँते बारीक और पास-पास हैं तथा ऊपर आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं।
6.6.10 हार के मनके — छोटे सोने के मनकों की एक अर्धवृत्ताकार पंक्ति, बीच में एक बड़ा टुकड़ा।
चित्र 6.6 (पृष्ठ 123) — शुंगकालीन वस्तुओं का कोलाज; छायाचित्र, जिनका वर्णन यहाँ दिया गया है। चित्र स्वयं पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर
नमूना उत्तर — प्रश्न जिस प्रकार की टिप्पणी माँगता है। कोलाज में दस वस्तुएँ हैं; अपने विचार इस प्रकार वर्गीकृत कीजिए।
चित्र 6.6 की वस्तु
क्या दिखाई देता है
6.6.1 ग्रीक योद्धा को दर्शाता स्तंभ
छोटा कसा हुआ अंगरखा, छाती पर आड़ा पट्टा, कमर में तलवार और जूते — भारतीय स्तंभ पर उत्कीर्ण विदेशी वेशभूषा
6.6.2 पुरुष आकृति
ऊपरी शरीर अनावृत, चुन्नटदार धोती, भारी पगड़ी, बड़े कर्णाभूषण, चूड़ियाँ
6.6.3 बालक को गोद में लिए स्त्री
सजी हुई केश-रचना, बड़े गोल कुंडल, कई लड़ियों वाले हार, कमर में चौड़ी मनकों की मेखला, कलाई से कोहनी तक चूड़ियाँ, पायल
6.6.4 पंखे के साथ स्त्री
पंखा स्वयं दैनिक उपयोग की वस्तु है; यहाँ भी मेखला और चूड़ियों की पंक्तियाँ देखिए
6.6.5 गमला
पकी मिट्टी का, जिसकी पूरी सतह पर मनुष्यों और पशुओं की छोटी-छोटी आकृतियों की पंक्तियाँ हैं — अलंकृत घरेलू पात्र
6.6.6 बालों के आभूषण के साथ स्त्री की आकृति, पकी मिट्टी
मुकुट जैसी केश-सज्जा, माथे पर अर्धचंद्र — केश-सज्जा स्वयं एक कला थी
6.6.7 राजपरिवार
पगड़ी, आभूषण और लंबे दंड के साथ दो संपन्न आकृतियाँ — आभूषण वही, पर मात्रा अधिक
6.6.8 काँसे की चूड़ियाँ जिन पर सोने की पतली परत
यह वास्तविक आभूषण है, मूर्ति नहीं : सोने की परत चढ़ाना एक चतुर शिल्प-तकनीक थी, जिससे बहुमूल्य दिखने वाले गहने सुलभ हो जाते थे
6.6.9 हाथी दाँत का कंघा
बारीक लंबे दाँते और ऊपरी भाग पर आकृतियों तथा पशुओं का उत्कीर्णन — दैनिक वस्तु को भी सुंदर बनाया गया
6.6.10 हार के मनके
भिन्न-भिन्न आकार के छोटे स्वर्ण मनके, जिनमें एक छोटी पशु-आकृति भी है — अत्यंत सूक्ष्म स्वर्णकारी का प्रमाण
पूरे कोलाज से क्या पता चलता है :
वस्त्र मुख्यतः बिना सिले थे — धोती, साड़ी जैसा परिधान, कमरबंद और पगड़ी। अपवाद है ग्रीक योद्धा, जो सिला अंगरखा और जूते पहने है। अर्थात् विदेशी वेशभूषा परिचित थी और उसे सहजता से उत्कीर्ण किया गया।
आभूषण सभी ने पहने हैं, पुरुषों ने भी : कुंडल, हार, बाजूबंद, चूड़ियाँ, मेखला, पायल। सामग्री — पकी मिट्टी, काँसा, सोने की परत चढ़ा काँसा, स्वर्ण और हाथी दाँत।
दैनिक वस्तुएँ भी सजाई जाती थीं — कंघा, गमला, पंखा। कला केवल मंदिरों तक सीमित नहीं थी।
पकी मिट्टी की इतनी वस्तुएँ बताती हैं कि केवल धनी नहीं, साधारण लोग भी सुंदर गढ़ी हुई आकृतियाँ रख सकते थे। मिट्टी सस्ती थी, कौशल नहीं।
यह कीजिए : 6.6.8 की तुलना आज बिकने वाली किसी सोने की परत चढ़ी चूड़ी से कीजिए। सस्ती धातु पर सोने की पतली परत — यह तकनीक दो हजार वर्ष से भी पुरानी है।