प्र1.
क्या आपको कक्षा 6 की ‘शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य’ में योग सूत्रों के कुछ अंश याद हैं?
उत्तर
हाँ। योग सूत्र — छोटे, सारगर्भित वाक्य (सूत्र अर्थात् ‘धागा') — इसी काल में महर्षि पतंजलि द्वारा संकलित किए गए थे, जब संस्कृत दार्शनिक और साहित्यिक रचनाओं की प्रमुख भाषा बन चुकी थी।
कक्षा 6 में जो अभ्यास कराया गया था, उसका मूल यहीं है :
| जो अभ्यास आपने किया | योग सूत्रों में उसका स्थान |
|---|---|
| आसन | स्थिर और सुखपूर्ण मुद्रा — अष्टांग योग का तीसरा अंग |
| प्राणायाम | श्वास का नियमन — चौथा अंग; व्यायाम से पहले और बाद में यही कराया जाता है |
| ध्यान | एकाग्रता और वह शांत सजगता जिसके साथ प्रत्येक क्रिया करने को कहा जाता है |
| यम और नियम | दूसरों के प्रति तथा स्वयं के प्रति आचरण के नियम — शौच, सत्य, अहिंसा, संतोष |
यह इतिहास के अध्याय में क्यों : इससे पता चलता है कि ‘पुनर्गठन का काल' केवल राजाओं और युद्धों का काल नहीं था। जब राज्य सीमाओं के लिए लड़ रहे थे, तब विद्वान ऐसे ग्रंथों की रचना और संकलन कर रहे थे जिनका उपयोग भारतीय आज भी करते हैं। योग उस काल और आपकी कक्षा के बीच जीवित कड़ी है।
क्या आप जानते हैं? पतंजलि ने योग का आविष्कार नहीं किया — उन्होंने पहले से चली आ रही शिक्षाओं को एकत्र और व्यवस्थित किया। इसीलिए पुस्तक ‘संकलित' शब्द का प्रयोग करती है।