अन्वेषण अध्याय 6 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपके विचार में कुछ इंडो-ग्रीक सिक्कों पर वासुदेव-कृष्ण या लक्ष्मी जैसे देवी-देवताओं के चित्र अंकित होने का क्या अर्थ रहा होगा?
उत्तर

इसका अर्थ है कि इंडो-ग्रीक शासक अपनी भारतीय प्रजा से उसी भाषा में बात कर रहे थे जिसे वह समझती थी — और यह भी कि वे स्वयं भारतीय देवताओं को स्वीकार करने लगे थे।

अधिकांश इंडो-ग्रीक सिक्कों पर एक ओर राजा और दूसरी ओर ग्रीक देवता होते हैं। जब किसी सिक्के पर उनके स्थान पर वासुदेव-कृष्ण (चित्र 6.20 के चौकोर चाँदी के सिक्के पर चक्र और गदा जैसी वस्तु लिए हुए) या लक्ष्मी आ जाते हैं, तो कुछ बदल चुका होता है। संभावित अर्थ, जिनका आधार अध्याय में ही है :

  1. स्वीकृति पाना। विजेता बनकर आए शासकों को चाहिए था कि उनके सिक्के भारतीय व्यापारियों से भरे बाज़ारों में चलें। परिचित देवता ने मुद्रा को — और शासक को — स्वीकार्य बनाया।
  2. स्थानीय आस्थाओं को सचमुच अपनाना। अध्याय कहता है कि वे “समृद्ध स्थानीय संस्कृति से बहुत प्रभावित हुए”। हेलियोडोरस स्तंभ इसका प्रमाण है : एक इंडो-ग्रीक राजदूत वासुदेव को ‘देवताओं का देवता' कहते हैं और तीन उपदेश अंकित कराते हैं — आत्म-संयम, दान, चेतना
  3. एक राजनीतिक संदेश। राजकीय मुद्रा पर भारतीय देवता का अर्थ है — अब यह भूमि हमारी भी है
  4. लक्ष्मी की दशा में समृद्धि। सिक्का धन का प्रतीक है और लक्ष्मी धन की देवी — मुद्रा के लिए अत्यंत उपयुक्त चित्र।
  5. सांस्कृतिक संगम का साक्ष्य। एक ओर ग्रीक लिपि और ग्रीक शैली का मुख-चित्र, दूसरी ओर भारतीय देवता : एक छोटी-सी वस्तु पर दो संसार मिलते हुए।
सिक्के इतने अच्छे साक्ष्य क्यों : अध्याय बताता है कि इंडो-ग्रीक सिक्कों से ही “हमें इन शासकों के बारे में अधिकांश जानकारी मिली है”। सोने, चाँदी, ताँबे और गिलट के ये सिक्के तब भी बचे रहते हैं जब भवन और ग्रंथ नष्ट हो जाते हैं — और चूँकि वे राज्य द्वारा जारी होते थे, उन पर अंकित प्रत्येक चित्र सोच-समझकर चुना गया होता था।
संकेत : दो पृष्ठ आगे कनिष्क के सिक्कों की व्याख्या भी इसी तर्क से होती है — एक पर बुद्ध, दूसरे पर नंदी सहित शिव। विदेशी मूल के शासकों ने बार-बार मुद्रा के माध्यम से अपनी प्रजा की आस्थाओं का सम्मान प्रकट किया।
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