प्र1.
उपर्युक्त अंकों की श्रृंखला में से कौन-से अंक कुछ-कुछ हमारे आधुनिक अंकों जैसे दिखते हैं? कौन-से नहीं?
उत्तर
पृष्ठ पर सात ब्राह्मी चिह्न छपे हैं, जिनके ऊपर मान लिखे हैं — 1, 2, 4, 6, 7, 9 और 10। मुद्रित पृष्ठ पर वे इस प्रकार दिखते हैं :
| मान | ब्राह्मी चिह्न जैसा छपा है | क्या हमारे अंक जैसा? |
|---|---|---|
| 1 | एक छोटी आड़ी रेखा — | नहीं — हमारा 1 खड़ी रेखा है |
| 2 | एक के नीचे एक, दो आड़ी रेखाएँ = | नहीं — पर विचार सरल है : रेखाएँ गिन लीजिए |
| 4 | खड़ी रेखा, उस पर आड़ा डंडा और ऊपर कटोरी जैसा मोड़ | कुछ-कुछ — हमारे 4 जैसी कटी हुई बनावट है, आकृति नहीं |
| 6 | नीचे आकर छोटे छल्ले में बंद होता वक्र | हाँ — बहुत मिलता-जुलता। हमारा 6 तेज़ी से लिखिए, यही बनेगा |
| 7 | ऊपर छोटी रेखा, फिर तीखा मोड़ नीचे-बाईं ओर, सिरे पर हुक | हाँ — लगभग वैसा ही जैसा हमारा 7 |
| 9 | खुला ‘स' जैसा घुमाव, ऊपर हुक | नहीं — हमारे 9 से कोई साम्य नहीं |
| 10 | ग्रीक अक्षर α जैसी आकृति | नहीं — और ध्यान दीजिए, यह एक ही चिह्न है, ‘1' और ‘0' नहीं |
हमारे जैसे दिखते हैं : 6 और 7 (तथा कुछ हद तक 4)
नहीं दिखते : 1, 2, 9 और 10
नहीं दिखते : 1, 2, 9 और 10
ऐसा क्यों होता है : शताब्दियों तक तेज़ी से लिखते-लिखते आकृतियाँ बदलती जाती हैं। कुछ ब्राह्मी चिह्न अपना रूप बनाए रखकर भारत से पश्चिम एशिया और फिर यूरोप तक पहुँचे, जहाँ उन्हें ‘अरबी अंक' कहा गया — जबकि अरबों ने स्वयं उन्हें हिंदसा अर्थात् ‘भारत से आए' कहा। यह अभिलेख “इस बात का एक साक्ष्य है कि आधुनिक अंकों की उत्पत्ति भारत में ही हुई।”
संकेत : यह भी देखिए कि इस शृंखला में क्या नहीं है — शून्य का चिह्न और स्थानीय मान (प्लेस वैल्यू)। ब्राह्मी में 10 के लिए अलग चिह्न था। शून्य और स्थानीय मान बाद में आए, और उन्हीं ने भारतीय अंकों को विश्व का गणित बना दिया।