अन्वेषण अध्याय 6 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उपर्युक्त अंकों की श्रृंखला में से कौन-से अंक कुछ-कुछ हमारे आधुनिक अंकों जैसे दिखते हैं? कौन-से नहीं?
उत्तर

पृष्ठ पर सात ब्राह्मी चिह्न छपे हैं, जिनके ऊपर मान लिखे हैं — 1, 2, 4, 6, 7, 9 और 10। मुद्रित पृष्ठ पर वे इस प्रकार दिखते हैं :

मानब्राह्मी चिह्न जैसा छपा हैक्या हमारे अंक जैसा?
1एक छोटी आड़ी रेखानहीं — हमारा 1 खड़ी रेखा है
2एक के नीचे एक, दो आड़ी रेखाएँ =नहीं — पर विचार सरल है : रेखाएँ गिन लीजिए
4खड़ी रेखा, उस पर आड़ा डंडा और ऊपर कटोरी जैसा मोड़कुछ-कुछ — हमारे 4 जैसी कटी हुई बनावट है, आकृति नहीं
6नीचे आकर छोटे छल्ले में बंद होता वक्रहाँ — बहुत मिलता-जुलता। हमारा 6 तेज़ी से लिखिए, यही बनेगा
7ऊपर छोटी रेखा, फिर तीखा मोड़ नीचे-बाईं ओर, सिरे पर हुकहाँ — लगभग वैसा ही जैसा हमारा 7
9खुला ‘स' जैसा घुमाव, ऊपर हुकनहीं — हमारे 9 से कोई साम्य नहीं
10ग्रीक अक्षर α जैसी आकृतिनहीं — और ध्यान दीजिए, यह एक ही चिह्न है, ‘1' और ‘0' नहीं
हमारे जैसे दिखते हैं :  6  और  7  (तथा कुछ हद तक 4)
नहीं दिखते :  1, 2, 9  और  10
ऐसा क्यों होता है : शताब्दियों तक तेज़ी से लिखते-लिखते आकृतियाँ बदलती जाती हैं। कुछ ब्राह्मी चिह्न अपना रूप बनाए रखकर भारत से पश्चिम एशिया और फिर यूरोप तक पहुँचे, जहाँ उन्हें ‘अरबी अंक' कहा गया — जबकि अरबों ने स्वयं उन्हें हिंदसा अर्थात् ‘भारत से आए' कहा। यह अभिलेख “इस बात का एक साक्ष्य है कि आधुनिक अंकों की उत्पत्ति भारत में ही हुई।”
संकेत : यह भी देखिए कि इस शृंखला में क्या नहीं है — शून्य का चिह्न और स्थानीय मान (प्लेस वैल्यू)। ब्राह्मी में 10 के लिए अलग चिह्न था। शून्य और स्थानीय मान बाद में आए, और उन्हीं ने भारतीय अंकों को विश्व का गणित बना दिया।
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