प्र1.
लगभग दो सहस्राब्दी पूर्व के इन शैलकृत कक्षों की समरूपता पर ध्यान दीजिए। शिल्पकारों को केवल छेनी और हथौड़ी से यह अद्भुत दक्षता कैसे प्राप्त हुई होगी? कल्पना कीजिए कि आप उस युग में एक शिल्पी हैं और अपने कौशल से पत्थर को कला में रूपांतरित कर रहे हैं। आप किन उपकरणों का प्रयोग करेंगे?
उत्तर
चित्र 6.13.1 को फिर देखिए : दो मंज़िलों में एक जैसे द्वार, एक जैसे कक्ष और समान अंतराल पर स्तंभ, और यह सब एक ही पहाड़ी को काटकर। यहाँ कुछ जोड़ा नहीं गया — जो बचा है, वह पत्थर हटाने के बाद बचा है।
इतनी समरूपता कैसे संभव हुई :
| शिल्पकारों ने क्या किया | इससे शुद्धता कैसे आई |
|---|---|
| उपयुक्त चट्टान चुनी | समान कणों वाला, दरार-रहित बलुआ पत्थर एक जैसा कटता है |
| पहले रेखांकन किया | पहली चोट से पहले डोरी, साहुल और पट्टी से चट्टान पर रेखाएँ खींची जाती थीं |
| ऊपर से नीचे की ओर काटा | छत से आरंभ करने पर मचान की आवश्यकता नहीं रहती — नीचे की चट्टान स्वयं मंच बनी रहती है और मलबा तैयार भाग पर नहीं गिरता |
| पहले मोटा, फिर बारीक काम | भारी नोकदार औज़ार से बड़ा भाग हटाया गया, महीन छेनियों से आकार दिया गया, फिर रगड़-पत्थर और बालू से चिकना किया गया |
| एक ही माप बार-बार दोहराई | हर द्वार के लिए एक ही मापदंड — यही ‘समरूपता' का रहस्य है |
| प्रशिक्षित दलों में काम किया | मुख्य शिल्पी योजना बनाते, शिष्य मोटा काम करते। कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा |
यदि मैं उस काल का शिल्पी होता तो मेरे उपकरण होते :
- लोहे का हथौड़ा और चट्टान तोड़ने के लिए भारी लोहे की नोक।
- विभिन्न चौड़ाई की चपटी और नोकदार छेनियाँ, तथा सतह समतल करने के लिए दंतीदार छेनी।
- खड़ी रेखाओं के लिए साहुल (डोरी में बँधा पत्थर), समकोण के लिए गुनिया, माप दोहराने के लिए मापदंड और सीधी रेखाओं के लिए रंग में डूबी डोरी।
- लकड़ी की फानें — कटी हुई खाँचों में ठोंककर पानी डालने पर वे फूलती हैं और चट्टान इच्छित रेखा पर चिरती है।
- अंतिम चमक के लिए बालू, पानी और रगड़-पत्थर; अँधेरे कक्षों में काम के लिए तेल के दीपक; मलबा ढोने के लिए टोकरियाँ।
असली रहस्य : यहाँ शुद्धता बेहतर औज़ारों से नहीं, विधि से आई — नापो, रेखांकन करो, चरणों में काटो और एक ही मानक दोहराओ। शेष काम लोहे की छेनी और धैर्य कर देते हैं। आज का बढ़ई भी यही तर्क अपनाता है।
यह कीजिए : साबुन की टिकिया पर पेंसिल से एक द्वार बनाइए और भोथरे चाकू से ऊपर से नीचे की ओर खोखला कीजिए। पाँच मिनट में समझ आ जाएगा कि क्रम क्यों महत्वपूर्ण है — मिट्टी के विपरीत, पत्थर वापस नहीं जोड़ा जा सकता।