प्र1.
क्या आपको पिछले अध्याय में वर्णित कलिंग युद्ध का स्मरण है?
उत्तर
हाँ। कलिंग युद्ध सम्राट अशोक द्वारा कलिंग (लगभग वर्तमान ओडिशा) पर किया गया आक्रमण था, जो लगभग 261 सा.सं.पू. में हुआ। उसमें हुए विनाश और जनहानि ने अशोक को इतना विचलित किया कि उन्होंने युद्ध द्वारा विजय (भेरीघोष) छोड़कर धम्म द्वारा विजय (धम्मघोष) का मार्ग अपनाया और इसे अपने शिलालेखों में अंकित करवाया।
अध्याय आपको यह इसलिए स्मरण कराता है कि उसी क्षेत्र में आगे क्या हुआ :
लगभग 261 सा.सं.पू. — अशोक द्वारा कलिंग की विजय
185 सा.सं.पू. के बाद — मौर्य साम्राज्य का पतन
→ कलिंग पुनः उभरा, अब चेदि वंश के अधीन एक प्रमुख शक्ति के रूप में
→ उसके महान शासक खारवेल ने अपनी उपलब्धियाँ हाथीगुंफा अभिलेख में अंकित करवाईं
185 सा.सं.पू. के बाद — मौर्य साम्राज्य का पतन
→ कलिंग पुनः उभरा, अब चेदि वंश के अधीन एक प्रमुख शक्ति के रूप में
→ उसके महान शासक खारवेल ने अपनी उपलब्धियाँ हाथीगुंफा अभिलेख में अंकित करवाईं
यह क्यों महत्वपूर्ण है : यही अध्याय के शीर्षक वाला ‘पुनर्गठन' एक स्थान पर घटित होते हुए दिखता है। साम्राज्य में मिला लिया गया क्षेत्र लुप्त नहीं हुआ; ज्यों ही साम्राज्य दुर्बल हुआ, कलिंग अपने वंश, अपने राजधानी-क्षेत्र (भुवनेश्वर के समीप) और पत्थर पर अंकित अपने इतिहास के साथ फिर स्वतंत्र राज्य बन गया।