अन्वेषण अध्याय 6 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 6.14 में दिए गए मानचित्र में आप विभिन्न राज्यों के नामों के साथ कुछ विशिष्ट चिह्न भी देख सकते हैं। ये चिह्न क्या दर्शाते हैं? विचार कीजिए कि ये प्रत्येक राज्य की विशिष्ट पहचान को किस प्रकार दर्शाते हैं?
उत्तर

ये तीनों राज्यों के राजचिह्न हैं, जो प्रत्येक राज्य के भूभाग पर गड़े ध्वजों पर बने हैं। हर राजचिह्न उस वंश की पहचान है — सिक्कों, ध्वजों, मुहरों और अभिलेखों पर उसका प्रतीक।

राज्यध्वज पर चिह्न (चित्र 6.14)राजधानीचिह्न क्या संकेत देता है
चोललाल ध्वज पर छलाँग लगाता बाघउरैयूरशक्ति और साहस, वन का सबसे बलशाली शिकारी — उस वंश के लिए उपयुक्त जिसने ‘अपनी सर्वोच्चता स्थापित की'
चेरपीले ध्वज पर धनुष (और बाण)वंजि (करूर)कौशल और पहुँच — यही धनुष पृष्ठ 133 के चित्र 6.18 के चेर सिक्के पर भी दिखता है
पांड्यपीले ध्वज पर दो मछलियाँमदुरैसमुद्र — पांड्य ‘एक महत्वपूर्ण नौसैनिक शक्ति' थे और मोतियों के लिए प्रसिद्ध

ये चिह्न विशिष्ट पहचान किस प्रकार दर्शाते हैं :

  • ये तुरंत पहचाने जाते हैं — जो सैनिक, व्यापारी या ग्रामवासी पढ़ नहीं सकता था, वह भी जान लेता था कि किसका ध्वज फहरा रहा है।
  • ये प्रत्येक राज्य की शक्ति और भूगोल से मेल खाते हैं : समुद्री शक्ति के लिए मछली, कावेरी की उपजाऊ भूमि की स्थल-शक्ति के लिए बाघ, पश्चिमी पहाड़ी-वन क्षेत्र के लिए धनुष।
  • ये वंश को सतत पहचान देते हैं, जो अलग-अलग राजाओं के भुला दिए जाने के बाद भी बनी रहती है — इसीलिए आज का मानचित्रकार भी उन्हीं का प्रयोग कर सकता है।
  • ये प्रतिद्वंद्विता भी दर्शाते हैं : एक छोटे मानचित्र पर तीन अलग राजचिह्न उन तीन राज्यों का चित्र हैं जो “आपसी प्रतिद्वंद्विता” में लगे रहते थे।
क्या आप जानते हैं? ये चिह्न राज्यों से भी अधिक जीवित रहे। मछलियों की जोड़ी और धनुष आज भी तमिलनाडु तथा केरल के प्रतीकों और मंदिर-कला में दिखते हैं, और बाघ आगे चलकर परवर्ती चोलों का स्थायी राजचिह्न बना।
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