प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि इतिहासकार कई शताब्दियों पहले सुदूर स्थित दो राज्यों के बीच व्यापारिक संबंधों का पता कैसे लगाते हैं? आइए, इस पर विचार-विमर्श करें कि यह जानकारी कैसे प्राप्त की जाती होगी।
उत्तर
दो हजार वर्ष पुराने बीजक या रसीदें इतिहासकारों के पास नहीं होतीं। वे यह चित्र अनेक प्रकार के साक्ष्यों को मिलाकर बनाते हैं, जो एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
| साक्ष्य का प्रकार | यह व्यापार कैसे सिद्ध करता है | इस अध्याय से उदाहरण |
|---|---|---|
| दूर मिले सिक्के | मुद्रा व्यापारियों के साथ चलती है; विदेशी सिक्कों का ढेर बताता है कि वहाँ क्रय-विक्रय हुआ | सातवाहन सिक्के गुजरात से आंध्र प्रदेश तक मिले; दक्षिण भारत में रोमन सिक्के मिलते हैं |
| सिक्कों पर अंकित चित्र | वे बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में क्या महत्वपूर्ण था | दो मस्तूल वाले जहाज का सातवाहन सिक्का — जहाज-निर्माण और समुद्री व्यापार का प्रमाण |
| उत्खनन में मिली वस्तुएँ | दूर देश के मृद्भांड, मनके, काँच या धातु किसी स्थल पर व्यापार से ही पहुँच सकते हैं | सातवाहन राज्य में काँच और सुगंधित मलहम का आयात |
| अभिलेख | राजा और व्यापारी दान, कर और वस्तुओं का उल्लेख करते हैं | खारवेल लिखते हैं कि उन्हें पांड्य राज्य से सैकड़ों मोती प्राप्त हुए |
| विदेशी लेखकों के विवरण | यात्री और अधिकारी अपने देखे बंदरगाहों का वर्णन करते हैं | मेगस्थनीज की इंडिका पांड्य राज्य को समृद्ध और ग्रीस-रोम से व्यापार करता बताती है |
| साहित्य | कवि उन वस्तुओं और नगरों का वर्णन करते हैं जो उन्होंने देखे | सिलप्पदिकारम् हमें “समृद्ध व्यापारिक नगरों” से होकर ले जाती है; संगम काव्य बंदरगाहों का जीवन दर्शाते हैं |
| व्यापार मार्ग की संरचनाएँ | चुंगी-चौकियाँ, विश्राम-स्थल और बंदरगाह बताते हैं कि आवागमन कहाँ था | पुणे के पास नानेघाट गुफाएँ — कर-संग्रह और व्यापारियों के विश्राम के लिए |
| वस्तुओं की वैज्ञानिक जाँच | सामग्री की जाँच से पता चलता है कि वह कहाँ की खान या कहाँ की बनी है | मनके के पत्थर या पात्र की मिट्टी की जाँच से वस्तु का मूल क्षेत्र मिल जाता है |
एक साक्ष्य पर्याप्त क्यों नहीं : किसी खेत में मिला एक रोमन सिक्का बहुत कम सिद्ध करता है — वह किसी एक यात्री के पास आया हो सकता है या बहुत बाद में गिरा हो सकता है। परंतु रोमन सिक्के और रोमन मृद्भांड और उसी बंदरगाह का वर्णन करता ग्रीक लेखक और उन्हीं वस्तुओं का नाम लेती तमिल कविता — यह ऐसा प्रमाण बनाते हैं जो अकेला कोई साक्ष्य नहीं बना सकता। इतिहासकार इसे संपुष्टि कहते हैं।
यह कीजिए : कल्पना कीजिए कि 3000 सा.सं. में कोई पुरातत्ववेत्ता आपकी कक्षा खोदता है। कौन-सी वस्तुएँ सिद्ध करेंगी कि आपके नगर का दूसरे स्थानों से व्यापार था? सूची बनाइए और देखिए कि उनमें से कितनी को दूसरे साक्ष्य की आवश्यकता पड़ती है।