प्र1.
चेर राजाओं ने अपने शासनकाल में अनेक सिक्के निर्गत किए। क्या आप यहाँ दिए गए किसी एक सिक्के पर चेर राजवंश का राजचिह्न देख पा रहे हैं?
उत्तर
हाँ। यहाँ ताँबे के दो घिसे हुए सिक्के दिए गए हैं। दाहिनी ओर वाले सिक्के पर एक लंबा वक्र और उसके आर-पार जाती सीधी रेखा दिखाई देती है — यही धनुष-बाण है, चेर वंश का राजचिह्न। यह वही चिह्न है जो कुछ पृष्ठ पहले दक्षिण के राज्यों के मानचित्र (चित्र 6.14, पृष्ठ 130) में चेर ध्वज पर दिखा था।
| चित्र 6.18 का सिक्का | उस पर क्या दिखता है |
|---|---|
| बायाँ सिक्का | खड़ा हुआ कोई पशु, संभवतः हाथी, और उसके आस-पास धुँधले चिह्न |
| दायाँ सिक्का | धनुष-बाण — चेर राजचिह्न — और उसके ऊपर कुछ अन्य घिसे हुए प्रतीक |
राजा अपना चिह्न सिक्के पर क्यों अंकित करता है : सिक्का एक छोटा, कठोर, आसानी से चलने वाला सरकारी संदेश है। राजचिह्न एक साथ तीन बातें कहता है — यह मुद्रा किसने जारी की, इसके भार और धातु पर भरोसा किया जा सकता है, और चेर राजा की सत्ता वहाँ-वहाँ तक है जहाँ-जहाँ यह सिक्का पहुँचता है। इसीलिए इतिहासकारों के लिए सिक्के इतने मूल्यवान साक्ष्य हैं।
संकेत : प्राचीन सिक्के प्रायः जंग खाए और घिसे होते हैं। स्पष्ट चित्र के बजाय आकृति की रूपरेखा खोजिए — यहाँ एक लंबा वक्र और एक सीधी रेखा ही धनुष पहचानने के लिए पर्याप्त है।