अन्वेषण अध्याय 9 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऊपर दिए गए उदाहरणों का अध्ययन करने के पश्चात लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य सिद्धांतों को सूचीबद्ध करें। अपनी समझ के आधार पर नीचे दी गई गतिविधि कीजिए —
उत्तर

छह सिद्धांत, जो पृष्ठ 191–192 पर दिए गए हैं, और दो जो तालिका 9.1 से जुड़ते हैं।

मुख्य सिद्धांतइसका अर्थभारत में यह कैसे दिखता है
समानताप्रत्येक व्यक्ति को समान व्यवहार पाने का अधिकार; शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएँ समान रूप से; सभी कानून के समक्ष समानसमता का अधिकार; हर नागरिक के लिए एक ही कानून
स्वतंत्रतानागरिकों को स्वयं चयन करने और अपना मत अभिव्यक्त करने का अधिकारअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
प्रतिनिधि सहभागिताप्रत्येक नागरिक को चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार; चुने गए प्रतिनिधि विधायिका का भाग बनते हैंलोक सभा, राज्य सभा, विधान सभाएँ, पंचायतें
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकारनिर्धारित आयु से ऊपर के प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार18 वर्ष पर मताधिकार, गणराज्य के आरंभ 1950 से ही
मौलिक अधिकारसमानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शोषण के विरुद्ध अधिकार जैसे अधिकार प्रदान और संरक्षित किए जाते हैंसंविधान का भाग III
स्वतंत्र न्यायपालिकायह सुनिश्चित करती है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा हो और कानूनों का पालन नागरिक तथा सरकार के सभी अंग करेंउच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय
उत्तरदायित्वसरकार अपने चुनने वाली जनता के प्रति जवाबदेह होती हैनियमित और निश्चित अंतराल पर चुनाव — प्रत्येक पाँच वर्ष
शक्तियों का पृथक्करणविधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करतेतालिका 9.1 का अंतिम स्तंभ
स्वयं जाँचिए: अध्याय इन्हें आदर्श कहता है — ‘सभी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ इन आदर्शों को पूर्णतः व्यवहार में नहीं उतार पातीं।’ स्विट्जरलैंड पुराना लोकतंत्र है, फिर भी वहाँ महिलाओं को मताधिकार 1971 में मिला; ब्रिटेन में प्रभावी सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 1928 में और अमेरिका में 1965 में लागू हो सका। भारत में यह 1950 से ही है, गणराज्य के आरंभ से।
प्र2.
आपको अपने विद्यालय में एक विद्यार्थी समिति का गठन करना है। इसके लिए एक योजना बनाइए और उसे लोकतांत्रिक तरीके से लागू कीजिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि — समिति के कार्य स्पष्ट रूप से परिभाषित हों। समिति के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया लोकतांत्रिक हो।
उत्तर

यह क्रियाकलाप है, इसलिए महत्व योजना का है। अच्छी योजना में तीन बातें होनी चाहिए — स्पष्ट लिखित कार्य, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और बाद में जवाबदेही का उपाय। नीचे एक नमूना है, जिसे आप अपने विद्यालय के अनुसार बदल सकते हैं।

भाग 1 — कार्य निर्धारित कीजिए (प्रचार शुरू होने से पहले लिख लीजिए)

समिति का प्रकोष्ठउसका दायित्वसरकार का कौन-सा कार्य
नियम एवं योजनाप्रार्थना सभा, बस्तारहित दिवस, खेलकूद और स्वच्छता के नियमों का मसौदा बनाना और समिति में उन पर मतदान करानाविधायी
क्रियान्वयनदिन-प्रतिदिन की व्यवस्था — ड्यूटी सूची, सामग्री, मध्याह्न भोजन की स्वच्छताकार्यपालिका संबंधी
शिकायत एवं निष्पक्षताशिकायतें सुनना और यह देखना कि नियमों का पालन सबके लिए समान रूप से हो रहा हैन्यायिक

पहले ही तय कीजिए — समिति का आकार (प्रत्येक कक्षा से एक प्रतिनिधि), कार्यकाल (एक सत्र या एक वर्ष), बैठक कितनी बार होगी, और वह किन विषयों पर निर्णय नहीं लेगी (अंक, शुल्क या शिक्षकों से जुड़े विषय)।

भाग 2 — लोकतांत्रिक चुनाव कराइए

  1. घोषणा — तिथि, पद और नियम कम-से-कम एक सप्ताह पहले सूचना पट्ट पर।
  2. नामांकन — कक्षा का कोई भी विद्यार्थी खड़ा हो सकता है; एक अन्य विद्यार्थी उसका नाम प्रस्तावित करे।
  3. घोषणापत्र और प्रचार — प्रार्थना सभा में हर उम्मीदवार को बोलने का समान समय। कोई उपहार नहीं, कोई व्यक्तिगत आक्षेप नहीं।
  4. मतदान — एक विद्यार्थी, एक गुप्त मत, पर्ची पर, सीलबंद पेटी में। कक्षा के सभी विद्यार्थी मतदान करें, उम्मीदवार भी।
  5. मतगणना — दो विद्यार्थी पर्यवेक्षकों और एक शिक्षक के सामने। सर्वाधिक मत पाने वाला विजयी; बराबरी होने पर पुनर्मतदान।
  6. परिणाम और शपथ — परिणाम सूचना पट्ट पर; निर्वाचित सदस्य वचन दें कि वे पूरी कक्षा के लिए काम करेंगे, केवल अपने मित्रों के लिए नहीं।

भाग 3 — जवाबदेही बनाए रखिए — हर माह प्रार्थना सभा में छोटी रिपोर्ट, एक सुझाव-पेटी जिसका उपयोग कोई भी कर सके, और सत्र के अंत में नया चुनाव।

नमूना उत्तर: ‘हमारे विद्यालय में कक्षा 6 से 10 तक हैं, इसलिए हमने पाँच सदस्यों की समिति तय की — हर कक्षा से एक निर्वाचित प्रतिनिधि। पहले हमने समिति के कार्य एक चार्ट पर लिखकर गलियारे में लगाए। सोमवार को नामांकन खुले; हमारी कक्षा से चार विद्यार्थी खड़े हुए। बुधवार की प्रार्थना सभा में प्रत्येक ने दो मिनट बोला। शुक्रवार को हमने गुप्त मतदान किया और पर्चियाँ सीलबंद डिब्बे में डालीं। रेखा जी ने दो विद्यार्थी पर्यवेक्षकों के सामने गिनती की। आरव को 38 में से 21 मत मिले और वह हमारा प्रतिनिधि घोषित हुआ। समिति अब हर सोमवार मध्यावकाश में मिलती है और हर माह के पहले कार्यदिवस पर प्रार्थना सभा में रिपोर्ट देती है।'
गुप्त मतदान क्यों जरूरी है: 10वीं शताब्दी के उत्तरमेरूर शिलालेख (पृष्ठ 197) ग्राम सभा के लिए सीलबंद मतपेटियों का, सदस्यों की योग्यताओं का और उन्हें हटाए जाने की स्थितियों का वर्णन पहले ही कर चुके हैं। निष्पक्ष प्रक्रिया कोई आधुनिक आविष्कार नहीं — यह बहुत पुराना विचार है कि चुनाव को स्वतंत्र कैसे रखा जाए।
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