प्र1.
शासन प्रणलियों के विभिन्न स्वरूपों में निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार करें और रिक्त खानों को ‘हाँ’ या ‘नहीं’ से भरें—
उत्तर
पुस्तक पहली पंक्ति भर देती है (हाँ, नहीं, नहीं, नहीं)। शेष पंक्तियाँ भी उसी क्रम में चलती हैं, क्योंकि पाँचों विशेषताएँ एक ही मूल प्रश्न से निकलती हैं — क्या सत्ता का स्रोत जनता है।
| विशेषताएँ | लोकतंत्र | अधिनायकतंत्र | निरंकुश राजतंत्र | अल्पतंत्र |
|---|---|---|---|---|
| सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार | हाँ | नहीं | नहीं | नहीं |
| नागरिकों के मध्य समानता | हाँ | नहीं | नहीं | नहीं |
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | हाँ | नहीं | नहीं | नहीं |
| शक्तियों का पृथक्करण | हाँ | नहीं | नहीं | नहीं |
| सभी नागरिकों का कल्याण तथा समृद्धि | हाँ | नहीं | नहीं | नहीं |
हर ‘नहीं' के पीछे का कारण
| शासन प्रणाली | यह स्तंभ ‘नहीं' क्यों पढ़ता है |
|---|---|
| अधिनायकतंत्र | एक व्यक्ति या छोटे समूह के पास संपूर्ण सत्ता होती है और संविधान या कानून का कोई नियंत्रण नहीं। जब शासक से ऊपर कोई कानून ही न हो, तो न समान मताधिकार संभव है, न संरक्षित अभिव्यक्ति, न स्वतंत्र न्यायालय। |
| निरंकुश राजतंत्र | राजा कानून बनाता है, लागू कराता है और उल्लंघन पर न्यायिक निर्णय भी देता है — तीनों कार्य एक ही हाथ में हैं, इसलिए शक्तियों का पृथक्करण असंभव है। सिंहासन वंशानुगत है, इसलिए मतदान का प्रश्न ही नहीं उठता। |
| अल्पतंत्र | कुछ शक्तिशाली लोग सारे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। कागज पर चुनाव हों भी, तो वास्तविक चयन कुछ ही लोगों के पास रहता है — जैसा 1889 के व्यंग्य-चित्र में दिखता है, जहाँ जनता के द्वार पर ‘बंद' लिखा है। |
अंतिम पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। ‘नहीं' का अर्थ यह नहीं कि किसी राजा ने कभी प्रजा के लिए काम नहीं किया। अध्याय इसका उलटा उदाहरण भी देता है — राजा चंद्रापीड मोची को उसकी झोंपड़ी का मूल्य देते हैं, और राजधर्म का आदर्श भी वहीं है। ‘नहीं' का अर्थ है कि व्यवस्था इसकी गारंटी नहीं देती: निरंकुश राजतंत्र में जनता का कल्याण एक व्यक्ति के चरित्र पर निर्भर है, जबकि लोकतंत्र में यह एक ऐसा कर्तव्य है जिसके लिए सरकार जवाबदेह है और जिसे न निभाने पर उसे हटाया जा सकता है।
ध्यान दें: लोकतंत्र पाँचों पर ‘हाँ' पाता है, पर आदर्श रूप में। कोई विशेष लोकतंत्र इन्हें पूरी तरह प्राप्त कर पाता है या नहीं, यह अलग प्रश्न है — और अध्याय का अंतिम भाग उसी पर चर्चा करता है।