प्र1.
महोदये ! अण्डमान-जनाः आजीविकार्थं किं कुर्वन्ति ?
उत्तर
तत्र मुक्तामालाः, शुक्तिशिल्पानि, नारिकेल-शिल्पानि, उपस्कराः च इत्यादीनाम् उत्पादनेन वाणिज्येन च तेषाम् आजीविका चलति। केचन कृषिकार्येण मत्स्यव्यापारेण च जीविकां निर्वहन्ति।
| आजीविका-साधनम् | हिन्दी |
|---|---|
| मुक्तामालानाम् उत्पादनं वाणिज्यं च | मोतियों की मालाएँ बनाना और बेचना |
| शुक्तिशिल्पानि | सीपियों की शिल्पकला |
| नारिकेल-शिल्पानि | नारियल से बनी वस्तुएँ |
| उपस्कराणाम् उत्पादनम् | मसालों का उत्पादन |
| कृषिकार्यम् | खेती |
| मत्स्यव्यापारः | मछली का व्यापार |
हिन्दी अर्थ: वहाँ मोतियों की मालाएँ, सीपियों की शिल्पकला, नारियल की वस्तुएँ और मसाले आदि बनाने तथा उनके व्यापार से लोगों की आजीविका चलती है। कुछ लोग खेती और मछली के व्यापार से जीवन-यापन करते हैं।
व्याकरण-सङ्केतः: उत्पादनेन, वाणिज्येन, कृषिकार्येण, मत्स्यव्यापारेण — सर्वाणि तृतीया विभक्तिः, एकवचनम् (साधनार्थे — करण)।