प्र1.
उदाहरणानुसारम् एकवचनरूपं दृष्ट्वा द्विवचन-बहुवचनरूपाणि लिखन्तु — यथा : कम्प् — कम्पते, कम्पेते, कम्पन्ते । (धातवः — वर्ध्, वर्त्, प्र + काश्, वन्द्, याच्, लज्ज्, वीक्ष्, सेव्, वन्द्, शुभ्)
उत्तर
पहले दिए गए एकवचन रूप का पुरुष पहचानिए, फिर उसी पुरुष का द्विवचन और बहुवचन लिखिए। पूरी तालिका —
| धातुः | एकवचनम् (पुस्तक में दिया) | पुरुषः | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| कम्प् (यथा) | कम्पते | प्रथमः | कम्पेते | कम्पन्ते |
| वर्ध् | वर्धते | प्रथमः | वर्धेते | वर्धन्ते |
| वर्त् | वर्तसे | मध्यमः | वर्तेथे | वर्तध्वे |
| प्र + काश् | प्रकाशते | प्रथमः | प्रकाशेते | प्रकाशन्ते |
| वन्द् | वन्दे | उत्तमः | वन्दावहे | वन्दामहे |
| याच् | याचते | प्रथमः | याचेते | याचन्ते |
| लज्ज् | लज्जसे | मध्यमः | लज्जेथे | लज्जध्वे |
| वीक्ष् | वीक्षते | प्रथमः | वीक्षेते | वीक्षन्ते |
| सेव् | सेवे | उत्तमः | सेवावहे | सेवामहे |
| वन्द् | वन्दसे | मध्यमः | वन्देथे | वन्दध्वे |
| शुभ् | शोभते | प्रथमः | शोभेते | शोभन्ते |
सबसे बड़ी सावधानी — पुरुष बदलना नहीं है: इस प्रश्न में तीनों पुरुषों के रूप मिलाकर दिए गए हैं। जिस पुरुष का एकवचन दिया है, उसी पुरुष का द्विवचन-बहुवचन लिखना है। पहचान का सूत्र —
- अन्त में –ते हो तो प्रथमः पुरुषः → द्वि. –एते, बहु. –अन्ते
- अन्त में –से हो तो मध्यमः पुरुषः → द्वि. –एथे, बहु. –ध्वे
- अन्त में –ए हो तो उत्तमः पुरुषः → द्वि. –आवहे, बहु. –आमहे
धात्वर्थाः: वर्ध् = बढ़ना; वर्त् = होना/रहना; प्र+काश् = चमकना; वन्द् = प्रणाम करना; याच् = माँगना; लज्ज् = लजाना; वीक्ष् = देखना; सेव् = सेवा करना; शुभ् = शोभा पाना; कम्प् = काँपना। ध्यान दीजिए — शुभ् धातु का अङ्ग गुण होकर शोभ बनता है, इसीलिए रूप ‘शोभते’ है, ‘शुभते’ नहीं।