दीपकम् अध्याय 4 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एकः शृगालः इति गीतस्य साभिनयं कक्षायां गानं कुर्वन्तु।
उत्तर

यह करने का प्रश्न है — कक्षा में मिलकर ‘एकः शृगालः’ गीत गाइए और साथ-साथ अभिनय (मूक-अभिनय) कीजिए। नीचे गीत की पूरी पंक्तियाँ और हर पंक्ति पर करने योग्य अभिनय दिया है।

गीत-पङ्क्तिःहिन्दी अर्थअभिनयः (क्या करें)
एकः शृगालः वनं गच्छति ।एक सियार वन जाता है।एक ओर से धीरे-धीरे चलते हुए मंच पर आइए
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति ।प्यास और भूख से वन जाता है।पेट पर तथा गले पर हाथ रखकर भूख-प्यास दिखाइए
तत्र गच्छति, किमपि न लभते ।वहाँ जाता है, कुछ भी नहीं पाता।इधर-उधर खोजते हुए दोनों हाथ फैलाइए
सः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते ।वह थक जाता है, दुखी हो जाता है।कंधे ढीले करके थका हुआ मुख बनाइए
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति ।बाएँ देखता है, दाएँ देखता है।बाएँ–दाएँ, फिर आगे–पीछे गरदन घुमाइए
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते ।उसे पसीना आता है, प्यास लगती है।माथे से पसीना पोंछने का अभिनय कीजिए
सः पश्यति द्राक्षाफलम् ।वह अंगूर देखता है।ऊपर की ओर उँगली उठाकर आँखें बड़ी कीजिए
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते ।उसी क्षण उसके मुँह में लार आ जाती है।होंठों पर जीभ फेरने का संकेत कीजिए
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति ।एक बार उछलता है, दो बार उछलता है।गिनती के साथ तीन-चार बार उछलिए
आम्लं द्राक्षाफलम्, आम्लं द्राक्षाफलम् ।अंगूर खट्टे हैं, अंगूर खट्टे हैं।मुँह बनाकर नाक-भौं सिकोड़िए
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।ऐसा कहकर वह भाग जाता है।मुँह फेरकर तेज़ी से मंच से बाहर जाइए
गाने का ढंग: गीत की हर पंक्ति में दोहराव है — ‘सः वनं गच्छति, सः वनं गच्छति’। इसीलिए इसे दो दलों में बाँटकर गाइए — पहला दल पहली आधी पंक्ति गाए, दूसरा दल उसे दोहराए। ताल के लिए हाथ से थपकी दीजिए; ‘उत्पतति’ पर सब उछलें — इससे गीत याद भी हो जाएगा और आनन्द भी आएगा।
सुझाव: एक छात्र शृगाल बने, दो-तीन छात्र हाथ ऊपर उठाकर द्राक्षालता बनें और शेष सब कोरस (समवेत गान) गाएँ। कागज़ के अंगूर बनाकर ऊपर लटकाइए — दृश्य और भी सुन्दर लगेगा।
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