प्र1.
प्रियच्छात्राः ! जीवने सफलतायै मानवः किं किम् अर्जयेत् ?
उत्तर
छात्राः वदन्ति — विद्याम् ! उपाधिम् ! पदवीम् ! धनम् !
[विद्या! उपाधि! पदवी! धन!]
पूर्णवाक्येन — जीवने सफलतायै मानवः विद्याम्, उपाधिम्, पदवीं धनं च अर्जयेत् ।
[जीवन में सफलता के लिए मनुष्य को विद्या, उपाधि, पदवी और धन अर्जित करना चाहिए।]
व्याकरण-दृष्टि: सफलतायै — ‘सफलता’ (आकारान्त स्त्रीलिङ्ग) का चतुर्थी एकवचन; ‘के लिए’ अर्थ में चतुर्थी आती है। अर्जयेत् — ‘अर्ज्’ धातु का विधिलिङ्-लकार, प्रथमपुरुष एकवचन — ‘अर्जित करना चाहिए’। ‘विद्याम्, उपाधिम्, पदवीम्, धनम्’ सब कर्म हैं, अतः सब द्वितीया एकवचन में हैं।
ध्यान दें: ‘किं किम्’ की द्विरुक्ति ‘क्या-क्या’ का अर्थ देती है — अर्थात् उत्तर में एक नहीं, अनेक वस्तुएँ अपेक्षित हैं।