दीपकम् अध्याय 5 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कः प्रसिद्धः चिकित्सकः आसीत् ?
उत्तर

नागार्जुनः ।
[नागार्जुन।]

पाठ-आधारः:नागार्जुनः प्रसिद्धः रसायनशास्त्रज्ञः चिकित्सकः च आसीत् ।’ — वे रसायनशास्त्र के ज्ञाता भी थे और चिकित्सक भी।
विभक्ति: प्रश्न ‘कः’ (प्रथमा एकवचन, पुंलिङ्ग) से पूछा गया है, अतः उत्तर भी प्रथमा एकवचन — नागार्जुनः।
प्र2.
अन्यस्मिन् दिवसे कौ आगतौ ?
उत्तर

द्वौ युवकौ ।
[दो युवक।]

पाठ-आधारः:अन्यस्मिन् दिने द्वौ युवकौ आगतवन्तौ ।’ — राजा की व्यवस्था से अगले दिन दो योग्य युवक नागार्जुन के पास आए।
वचन देखिए: ‘कौ’ द्विवचन का प्रश्नवाचक है, इसलिए उत्तर भी द्विवचन में — द्वौ युवकौ (प्रथमा द्विवचन)। एक होता तो ‘कः – एकः युवकः’, अनेक होते तो ‘के – युवकाः’।
प्र3.
कः खिन्नः आसीत् ?
उत्तर

द्वितीयः युवकः ।
[दूसरा युवक।]

पाठ-आधारः:तदभ्यन्तरे द्वितीयः युवकः अपि आगतवान् । सः खिन्नः आसीत् ।’ — वह इसलिए दुःखी था कि दिए गए काम (रसायन-निर्माण) को पूरा नहीं कर सका।
शब्दार्थः: खिन्नः = दुःखितः (दुःखी, उदास)।
प्र4.
रुग्णस्य परिस्थितिः कथम् आसीत् ?
उत्तर

शोचनीया ।
[दयनीय / दुःखदायी।]

पाठ-आधारः:तस्य परिस्थितिः शोचनीया आसीत् ।’ — रोगी की दशा ऐसी थी कि उसे तुरन्त सहायता चाहिए थी; इसीलिए युवक उसे अपने घर ले गया।
लिङ्ग-मेल: ‘परिस्थितिः’ स्त्रीलिङ्ग है, अतः विशेषण भी स्त्रीलिङ्ग में — शोचनीया (न कि शोचनीयः)। पुंलिङ्ग में यह ‘शोचनीयः’ तथा नपुंसकलिङ्ग में ‘शोचनीयम्’ होता।
प्र5.
नागार्जुनः सहायकरूपेण कं चितवान् ?
उत्तर

द्वितीयं युवकम् ।
[दूसरे युवक को।]

पाठ-आधारः:तदनन्तरं नागार्जुनः द्वितीयं युवकं सहायकत्वेन स्वीकृतवान् ।’ — यद्यपि वह रसायन नहीं बना सका था, फिर भी उसमें सेवाभावना थी।
विभक्ति: प्रश्न ‘कम्’ (द्वितीया एकवचन) से है, अतः उत्तर भी द्वितीया एकवचन — द्वितीयं युवकम्। चितवान् = चयनं कृतवान् (चुना)।
प्र6.
कां विना चिकित्सकः न भवति ?
उत्तर

सेवाभावनां विना । (सेवायाः भावनां विना)
[सेवा की भावना के बिना।]

पाठ-आधारः:सेवाभावनां विना चिकित्सकः कथं भवेत् ?’ — यही नागार्जुन के चयन का मूल कारण है। औषध बनाना विद्या है, रोगी की पीड़ा अनुभव करना गुण है; चिकित्सक बनने के लिए दोनों चाहिए।
व्याकरण-नियम: ‘विना’ के योग में द्वितीया विभक्ति आती है — इसीलिए ‘सेवाभावनाम्’ (द्वितीया एकवचन)। (‘विना’ के साथ तृतीया तथा पञ्चमी भी शास्त्रसम्मत हैं, किन्तु पाठ में द्वितीया ही प्रयुक्त है।)
प्र7.
नागार्जुनः युवकौ केन मार्गेण गन्तुं सूचितवान् ?
उत्तर

राजमार्गेण ।
[राजमार्ग (मुख्य सड़क) से।]

यह सङ्केत ही परीक्षा था:गमनसमये राजमार्गेण गच्छताम्’ — नागार्जुन ने वह रोगी पहले ही मार्ग में देख लिया था (‘तं रोगिणम् अहं पूर्वमेव मार्गे दृष्टवान्’)। दोनों को उसी मार्ग से भेजकर उन्होंने देखा कि कौन रुककर सेवा करता है।
विभक्ति: ‘केन मार्गेण’ — मार्ग/साधन के अर्थ में तृतीया विभक्ति, अतः उत्तर भी तृतीया एकवचन — राजमार्गेणराजमार्गः = मुख्यमार्गः।
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