कार्य-विधि: दूसरों की भलाई में लगे रहने वाले किसी एक प्रेरक महापुरुष को चुनिए, उनके जीवन की एक ऐसी घटना खोजिए जिसमें सेवा दिखती हो, और उसे 6–8 सरल संस्कृत वाक्यों में लिखकर नीचे हिन्दी अर्थ जोड़ दीजिए। कथा के साथ चित्र चिपकाइए और अन्त में एक वाक्य में सन्देश लिखिए।
एक अच्छे उत्तर में ये चार बातें होनी चाहिए —
- महापुरुष का नाम, काल तथा स्थान (कः ? कदा ? कुत्र ?)
- सेवा की एक ठोस घटना — केवल प्रशंसा नहीं, घटना
- उस सेवा का परिणाम (किसे लाभ हुआ ?)
- अन्त में एक सूक्ति — जैसे ‘सेवा हि परमो धर्मः’ / ‘परोपकाराय सतां विभूतयः’
नमूना उत्तर (संस्कृतम्) —
महात्मा गान्धी दक्षिण-आफ्रिकादेशे अधिवक्ता आसीत् । एकदा तत्र प्लेगरोगः प्रसृतः । बहवः श्रमिकाः पीडिताः अभवन् । कोऽपि तेषां समीपं गन्तुं न इच्छति स्म । गान्धी स्वयं तेषां सेवां कृतवान् । सः औषधं दत्तवान्, अन्नं च योजितवान् । अनेके रोगिणः स्वस्थाः अभवन् । सः अवदत् — “सेवैव सत्यस्य साधनम्” इति ।
[हिन्दी — महात्मा गान्धी दक्षिण अफ्रीका में वकील थे। एक बार वहाँ प्लेग फैला। बहुत-से मजदूर पीड़ित हो गए। कोई उनके पास जाना नहीं चाहता था। गान्धी जी ने स्वयं उनकी सेवा की। उन्होंने औषध दी और भोजन की व्यवस्था की। बहुत-से रोगी स्वस्थ हो गए। उन्होंने कहा — “सेवा ही सत्य का साधन है।”]