दीपकम् अध्याय 6 पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अरे भारति ! बहिः वृष्टिः अस्ति, कथं क्रीडामः ?
उत्तर

भारती उत्तरं ददाति — वृष्टिः अस्तु नाम । इच्छा अस्ति चेत् क्रीडामः । बहिर्गमनस्य आवश्यकता एव नास्ति । एषा नूतना क्रीडा अस्ति भोः ! ‘अन्त्याक्षरी क्रीडा’ इति ।
[वर्षा हो रही है तो होने दो। यदि इच्छा है तो खेलेंगे। बाहर जाने की आवश्यकता ही नहीं है। यह एक नया खेल है — ‘अन्त्याक्षरी क्रीडा’।]

वाक्य कैसे बना: अस्तु नाम का अर्थ है ‘हो जाने दो / कोई बात नहीं’। इच्छा अस्ति चेत् — ‘चेत्’ का अर्थ ‘यदि’ है और वह वाक्य के आरम्भ में नहीं, बीच में आता है। बहिर्गमनस्य = बहिर्गमनम् + षष्ठी एकवचन, अर्थात् ‘बाहर जाने की’।
ध्यान दें: बहिः + गमनम् = बहिर्गमनम् — विसर्ग-सन्धि (विसर्ग के बाद ग् आने पर विसर्ग ‘र्’ हो जाता है)।
प्र2.
किम् अन्त्याक्षरी क्रीडा ? अहमपि क्रीडामि ।
उत्तर

अन्त्याक्षरी नाम सा क्रीडा यस्यां प्रथमः गणः यं श्लोकं गायति तस्य श्लोकस्य अन्तिमेन व्यञ्जनवर्णेन द्वितीयः गणः नूतनं श्लोकं गायति ।
[अन्त्याक्षरी वह खेल है जिसमें पहला गण जो श्लोक गाता है, उस श्लोक के अन्तिम व्यञ्जन वर्ण से दूसरा गण नया श्लोक गाता है।]

‘अन्त्याक्षरी’ शब्द का अर्थ: अन्त्यम् + अक्षरम् = अन्तिम अक्षर। जिस खेल का आधार ‘अन्तिम अक्षर’ हो, वही अन्त्याक्षरी। पाठ में यह श्लोकों से खेली जाती है, इसलिए पाठ का नाम है — क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् (आओ, हम श्लोक-अन्त्याक्षरी खेलें)।
प्र3.
सखि ! तर्हि क्रीडायाः नियमान् सूचयतु ।
उत्तर

क्रीडायाः नियमाः —

  1. वयं गणद्वयं रचयामः । प्रथमगणस्य नाम — ‘ज्ञानमाला’, द्वितीयगणस्य नाम — ‘रत्नमाला’
    [हम दो गण (टोलियाँ) बनाएँगे — पहली ‘ज्ञानमाला’, दूसरी ‘रत्नमाला’।]
  2. आदौ प्रथमगणस्य सदस्यः एकं पद्यं गायति ।
    [पहले पहली टोली का सदस्य एक श्लोक गाता है।]
  3. तस्य पद्यस्य अन्तिमेन व्यञ्जनवर्णेन द्वितीयगणस्य सदस्यः सदस्या वा अन्यं श्लोकं गायति ।
    [उस श्लोक के अन्तिम व्यञ्जन वर्ण से दूसरी टोली का सदस्य/सदस्या दूसरा श्लोक गाता है।]
  4. एवं क्रमशः क्रीडा प्रचलति ।
    [इसी क्रम से खेल आगे चलता रहता है।]
एक अतिरिक्त नियम (पृष्ठ 70 से): यदि पद के अन्त में म्-वर्णः, विसर्गः (ः) अथवा अनुस्वारः (ं) हो, तो उनसे पूर्व वाला व्यञ्जन लेकर अगला श्लोक/पद बोला जाता है। जैसे — भूषणम् के अन्त में ‘म्’ है, अतः उससे पहले का ण् लिया जाता है।
क्रिया-रूप देखिए: रचयामः, क्रीडामः, गायामः — ये उत्तमपुरुष बहुवचन (लट्-लकार) हैं। सूचयतु लोट्-लकार प्रथमपुरुष एकवचन है — आदरपूर्वक ‘बताइए’।
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