प्र1.
क, त, व, म, य इति पञ्चभिः वर्णैः श्लोकान् सङ्गृह्य स्फोरकपत्रे लिखन्तु, शिक्षकस्य अनुमत्या कक्षाभित्तिषु स्थापयन्तु ।
उत्तर
कार्यविधिः (कैसे करें) —
- पुस्तकालय, पाठ्यपुस्तक तथा ‘सुभाषितरत्नभाण्डागार’ जैसे संग्रहों से क, त, व, म, य — इन पाँच वर्णों से आरम्भ होने वाले श्लोक चुनिए (प्रत्येक वर्ण के लिए कम-से-कम एक)।
- प्रत्येक श्लोक को स्फोरकपत्रे (चार्ट पेपर पर) सुन्दर अक्षरों में लिखिए और नीचे उसका हिन्दी अर्थ लिखिए।
- चार्ट को सजाकर शिक्षक की अनुमति से कक्षा की दीवार पर लगाइए।
नमूना उत्तरम् (Sample answer) —
| वर्णः | श्लोकः | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| क | काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् । व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ॥ | बुद्धिमानों का समय काव्य-शास्त्र में, मूर्खों का व्यसन-नींद-कलह में बीतता है। |
| त | ताराणां भूषणं चन्द्रः लतानां भूषणं सुमम् । पृथिव्याः भूषणं राजा विद्या सर्वस्य भूषणम् ॥ | चन्द्र तारों का, फूल लताओं का, राजा पृथ्वी का — पर विद्या सबका आभूषण है। |
| व | विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् । पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥ | विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है। |
| म | माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः । न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ॥ | जो माता-पिता बालक को नहीं पढ़ाते वे शत्रु हैं; अनपढ़ सभा में हंसों के बीच बगुले-सा लगता है। |
| य | येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ | विद्या-तप-दान आदि से रहित लोग पृथ्वी पर भार हैं, मनुष्य-रूप में पशु हैं। |
सुझाव: चार्ट पर हर श्लोक के आगे उसका अन्तिम व्यञ्जन कोष्ठक में लिख दीजिए — इससे कक्षा में तुरन्त अन्त्याक्षरी खेली जा सकेगी।