दीपकम् अध्याय 6 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क, त, व, म, य इति पञ्चभिः वर्णैः श्लोकान् सङ्गृह्य स्फोरकपत्रे लिखन्तु, शिक्षकस्य अनुमत्या कक्षाभित्तिषु स्थापयन्तु ।
उत्तर

कार्यविधिः (कैसे करें) —

  1. पुस्तकालय, पाठ्यपुस्तक तथा ‘सुभाषितरत्नभाण्डागार’ जैसे संग्रहों से क, त, व, म, य — इन पाँच वर्णों से आरम्भ होने वाले श्लोक चुनिए (प्रत्येक वर्ण के लिए कम-से-कम एक)।
  2. प्रत्येक श्लोक को स्फोरकपत्रे (चार्ट पेपर पर) सुन्दर अक्षरों में लिखिए और नीचे उसका हिन्दी अर्थ लिखिए।
  3. चार्ट को सजाकर शिक्षक की अनुमति से कक्षा की दीवार पर लगाइए।

नमूना उत्तरम् (Sample answer) —

वर्णःश्लोकःहिन्दी अर्थ
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् । व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ॥बुद्धिमानों का समय काव्य-शास्त्र में, मूर्खों का व्यसन-नींद-कलह में बीतता है।
ताराणां भूषणं चन्द्रः लतानां भूषणं सुमम् । पृथिव्याः भूषणं राजा विद्या सर्वस्य भूषणम् ॥चन्द्र तारों का, फूल लताओं का, राजा पृथ्वी का — पर विद्या सबका आभूषण है।
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् । पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।
माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः । न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ॥जो माता-पिता बालक को नहीं पढ़ाते वे शत्रु हैं; अनपढ़ सभा में हंसों के बीच बगुले-सा लगता है।
येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥विद्या-तप-दान आदि से रहित लोग पृथ्वी पर भार हैं, मनुष्य-रूप में पशु हैं।
सुझाव: चार्ट पर हर श्लोक के आगे उसका अन्तिम व्यञ्जन कोष्ठक में लिख दीजिए — इससे कक्षा में तुरन्त अन्त्याक्षरी खेली जा सकेगी।
प्र2.
यथा अस्मिन् पाठे अन्त्याक्षरीश्लोकाः दत्ताः सन्ति तथैव विविधस्रोतोभ्यः (ग्रन्थालयः, अन्तर्जालम्, अध्यापकाः, मित्राणि इत्यादिभ्यः) सुभाषितानि चित्वा अन्त्याक्षरीक्रमेण लिखन्तु ।
उत्तर

कार्यविधिः — पुस्तकालय, अन्तर्जाल (इन्टरनेट), अध्यापकों और मित्रों से सुभाषित एकत्र कीजिए। फिर उन्हें ऐसे क्रम में सजाइए कि पहले श्लोक का अन्तिम व्यञ्जन ही अगले श्लोक का पहला वर्ण बने । यदि अन्त में म्, विसर्ग (ः) या अनुस्वार (ं) हो, तो उससे पूर्व वाला व्यञ्जन लीजिए।

नमूना उत्तरम् (Sample answer) — एक अन्त्याक्षरी-शृंखला:

  1. सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम् । (अन्त — ‘अप्रियम्’ → य्)
  2. यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् । एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति ॥ (अन्त — ‘सिध्यति’ → त्)
  3. तस्मात् शास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ । (अन्त — ‘व्यवस्थितौ’ → त्)
  4. तपःस्वाध्यायनिरतं तपस्वी वाग्विदां वरम् । (अन्त — ‘वरम्’ → र्)
  5. रत्नाकरधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम् । (अन्त — ‘किरीटिनीम्’ → न्)
  6. न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि ।
जाँचने का तरीका: हर श्लोक लिखने के बाद उसका अन्तिम पद अलग लिखकर उसमें से म्/विसर्ग/अनुस्वार हटाइए — जो व्यञ्जन बचे, अगला श्लोक ठीक उसी से आरम्भ होना चाहिए।
सावधानी: अन्तर्जाल से लिया गया श्लोक कक्षा में पढ़ने से पहले अध्यापक से शुद्धता की जाँच अवश्य करवाइए — वहाँ प्रायः अशुद्ध पाठ मिलते हैं।
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