दीपकम् अध्याय 6 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
राजा पृथिव्याः भूषणं भवति । (रेखाङ्कितम् — पृथिव्याः) [यथा / उदाहरणम्]
उत्तर

राजा कस्याः भूषणं भवति ?
[राजा किसका आभूषण होता है?]

नियम: रेखांकित पद पृथिव्याः — स्त्रीलिङ्ग, षष्ठी एकवचन है। अतः उसी लिङ्ग-विभक्ति-वचन का प्रश्नवाचक शब्द रखा जाएगा — कस्याः (किम् शब्द, स्त्रीलिङ्ग, षष्ठी एकवचन)। यही पुस्तक में उदाहरण के रूप में भरा हुआ है।
याद रखने योग्य जोड़ी: पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग षष्ठी एकवचन में कस्य, स्त्रीलिङ्ग में कस्याः
प्र2.
साधोः विद्या ज्ञानाय भवति । (रेखाङ्कितम् — साधोः)
उत्तर

कस्य विद्या ज्ञानाय भवति ?
[किसकी विद्या ज्ञान के लिए होती है?]

क्यों ‘कस्य’: साधोः — ‘साधु’ (उकारान्त पुंलिङ्ग) का षष्ठी एकवचन रूप है। पुंलिङ्ग षष्ठी एकवचन का प्रश्नवाचक = कस्य
सावधानी: ‘साधोः’ पञ्चमी एकवचन भी हो सकता है, पर यहाँ अर्थ ‘सज्जन की’ है, अतः षष्ठी ही है।
प्र3.
विद्या गुरूणां गुरुः । (रेखाङ्कितम् — गुरूणाम्)
उत्तर

विद्या केषां गुरुः ?
[विद्या किनकी गुरु है?]

क्यों ‘केषाम्’: गुरूणाम् पुंलिङ्ग षष्ठी बहुवचन है, अतः प्रश्नवाचक भी षष्ठी बहुवचन — केषाम् (वाक्य में अनुस्वार-सहित ‘केषां’)।
तुलना: एकवचन — कस्य, द्विवचन — कयोः, बहुवचन — केषाम् ।
प्र4.
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः भवन्ति । (रेखाङ्कितम् — भारभूताः)
उत्तर

ते मर्त्यलोके भुवि कीदृशाः भवन्ति ?
[वे मृत्युलोक में पृथ्वी पर कैसे होते हैं?]

क्यों ‘कीदृशाः’: रेखांकित पद भारभूताः एक विशेषण है (कैसे हैं — भार-स्वरूप)। विशेषण पर प्रश्न बनाते समय कीदृश् शब्द लिया जाता है; कर्ता ‘ते’ पुंलिङ्ग बहुवचन है, अतः रूप होगा कीदृशाः
ध्यान दें: यहाँ ‘के’ नहीं चलेगा, क्योंकि ‘के’ से व्यक्ति पूछा जाता है, गुण नहीं।
प्र5.
विद्याहीनाः न शोभन्ते । (रेखाङ्कितम् — विद्याहीनाः)
उत्तर

के न शोभन्ते ?
[कौन शोभा नहीं पाते?]

क्यों ‘के’: विद्याहीनाः वाक्य का कर्ता है — पुंलिङ्ग, प्रथमा बहुवचन। अतः प्रश्नवाचक भी प्रथमा बहुवचन — के
पूरा क्रम: एकवचन — कः, द्विवचन — कौ, बहुवचन — के ।
प्र6.
सर्वस्य लोचनं शास्त्रम् । (रेखाङ्कितम् — शास्त्रम्)
उत्तर

सर्वस्य लोचनं किम् ?
[सबकी आँख क्या है?]

क्यों ‘किम्’: शास्त्रम् नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा एकवचन है। नपुंसकलिङ्ग प्रथमा एकवचन का प्रश्नवाचक रूप = किम्
वाक्य का अर्थ: ‘सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्’ — शास्त्र ही सबकी आँख है, अर्थात् शास्त्र से ही सही-गलत दिखाई देता है।
प्र7.
विद्या राजसु पूज्यते । (रेखाङ्कितम् — विद्या)
उत्तर

का राजसु पूज्यते ?
[राजाओं में (राजसभाओं में) कौन पूजी जाती है?]

क्यों ‘का’: विद्या स्त्रीलिङ्ग, प्रथमा एकवचन है। स्त्रीलिङ्ग प्रथमा एकवचन का प्रश्नवाचक = का (द्विवचन — के, बहुवचन — काः)।
क्रिया अपरिवर्तित: प्रश्न बनाते समय केवल रेखांकित पद हटाकर प्रश्नवाचक रखिए; ‘पूज्यते’ ज्यों-का-त्यों रहेगा।
प्र8.
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् । (रेखाङ्कितम् — काव्यशास्त्रविनोदेन)
उत्तर

केन धीमतां कालो गच्छति ?
[किससे बुद्धिमानों का समय बीतता है?]

क्यों ‘केन’: काव्यशास्त्रविनोदेनतृतीया एकवचन (साधन)। तृतीया एकवचन का प्रश्नवाचक = केन
संकेत: ‘केन’ के स्थान पर ‘कथम्’ भी पूछा जा सकता है — धीमतां कालः कथं गच्छति ? — पर रेखांकित पद के आधार पर विभक्ति-मिलान करना हो तो केन ही ठीक है।
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