यह पुस्तक का दिया हुआ उदाहरण है, जो दिखाता है कि एक ही उत्तर बिलकुल भिन्न-भिन्न अनेक प्रश्नों का हो सकता है। पाठ्यपुस्तक स्वयं तीन परिस्थितियाँ देती है —
- “कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हमें तरबूज का बराबर भाग प्राप्त हो?”
- “मेरा निबंध विस्तृत है, मैं इसे लिफाफे में नहीं रख सकती।”
- “मैं इतने लंबे गीत पर नृत्य नहीं कर सकती....”
यही उत्तर और कहाँ-कहाँ चल सकता है, कुछ और उदाहरण —
- “यह विधि आठ लोगों के लिए है, पर हम तो केवल चार ही खाने वाले हैं।”
- “रंगोली का यह प्रारूप हमारी देहरी के लिए बहुत बड़ा है।”
- “मेरा विद्यालय-बस्ता प्रतिदिन उठाने के लिए बहुत भारी है।”
- “भाषण 10 मिनट का है और मुझे केवल 5 मिनट मिले हैं।”