ये परिवर्तन इसलिए होते हैं क्योंकि पौधा भोजन निर्मित कर रहा है और उसका उपयोग नए भागों को बनाने में कर रहा है। इसके लिए चार वस्तुएँ आवश्यक हैं —
- सूर्य का प्रकाश — भोजन बनाने के लिए ऊर्जा का स्रोत।
- जल — जड़ों द्वारा ग्रहण किया जाता है; भोजन निर्माण में तथा पौधे को स्फीत रखने में उपयोगी।
- वायु — इससे कार्बन डाइऑक्साइड मिलती है, जो भोजन का कच्चा माल है।
- मृदा के खनिज — जड़ें जल के साथ इन प्रमुख पोषकों को भी अवशोषित करती हैं।
पुस्तक में बच्चों द्वारा दिए गए चारों स्पष्टीकरण — जल, सूर्य का प्रकाश, जड़ों द्वारा मिट्टी से भोजन, तथा 'कुछ और' — सभी उचित परिकल्पनाएँ हैं। इनमें से दो (जल और सूर्य का प्रकाश) की जाँच क्रियाकलाप 10.1 में की जाती है। तीसरे में सुधार आवश्यक है — जड़ें मिट्टी से भोजन नहीं लेतीं, वे जल और खनिज ग्रहण करती हैं; भोजन तो पौधा अपनी पत्तियों में स्वयं बनाता है।
चर्चा क्यों कराई जाती है: विज्ञान में स्पष्टीकरण केवल आरंभ है। वह तब ज्ञान बनता है जब उसकी जाँच के लिए प्रयोग अभिकल्पित किया जाए — क्रियाकलाप 10.1 यही करता है।