कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी जंतुओं की भाँति पादपों को भोजन ग्रहण करते देखा है?
उत्तर

नहीं। किसी ने भी पौधे को भोजन खाते नहीं देखा है। जंतु बने-बनाए भोजन को मुख के द्वारा ग्रहण करते हैं, परंतु पौधों में न तो मुख होता है और न पाचन तंत्र — वे कुछ भी निगलते नहीं हैं।

पौधे हरे होते हैं और एक ही स्थान पर स्थिर रहते हैं — यही संकेत है। भोजन ग्रहण करने के स्थान पर वे अपनी पत्तियों में अपना भोजन स्वयं निर्मित करते हैं। पौधे में केवल कच्चा माल प्रवेश करता है — जड़ों से जल और खनिज तथा पत्तियों के सूक्ष्म छिद्रों से कार्बन डाइऑक्साइड।

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: पौधे भोजन बनाते हैं और जंतु नहीं बना सकते, इसलिए मनुष्य सहित प्रत्येक जंतु पौधों पर निर्भर है — या तो प्रत्यक्ष रूप से (रोटी, चावल, सब्ज़ी) अथवा परोक्ष रूप से (दूध, अंडा या माँस, जो पौधे खाने वाले जंतुओं से मिलते हैं)।
प्र2.
पादपों में वृद्धि होने पर आपको उनमें क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर

पौधे में वृद्धि होने पर ये परिवर्तन दिखाई देते हैं —

  • कलिकाओं से नवीन पत्तियाँ और शाखाएँ निकलती हैं।
  • पौधे की लंबाई (ऊँचाई) बढ़ती है — नवोद्भिद एक बड़ा पौधा बन जाता है।
  • तना मोटा और दृढ़ हो जाता है जिससे पौधा स्वयं को सँभाल पाता है।
  • जड़-तंत्र मिट्टी में और गहरा तथा चौड़ा फैलता है।
  • कुछ समय पश्चात पुष्प और फिर फल तथा बीज आते हैं।
  • जंतुओं की भाँति पौधे का भार भी बढ़ता है
स्वयं जाँचिए: टमाटर या मिर्च के छोटे पौधे के तने पर एक धागा ढीला बाँध दीजिए और एक तीली पर उसकी ऊँचाई अंकित कीजिए। दो सप्ताह बाद देखिए — धागा कस चुका होगा और निशान पौधे के शीर्ष से काफ़ी नीचे रह जाएगा।
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