कुतूहल अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.2: आइए, अन्वेषण करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखते हुए ग्लोब को उसके अक्ष के परित: वामावर्त दिशा में धीरे-धीरे घुमाइए। अवलोकन कीजिए कि आपकी अवस्थिति पृथ्वी के अक्ष के परित: किस प्रकार घूर्णन करती है और एक चक्र पूरा करने के पश्चात अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाती है।
उत्तर

ग्लोब पर अपने नगर की स्थिति पर एक छोटा स्टिकर लगाइए। अब ठीक उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखते हुए ग्लोब को धीरे-धीरे वामावर्त दिशा में घुमाइए।

अवलोकन: स्टिकर ऊपर या नीचे नहीं जाता — वह एक वृत्त पर चलता है जो विषुवत रेखा के समांतर होता है, और एक पूरा चक्कर लगाकर ठीक अपनी मूल स्थिति में लौट आता है। ग्लोब का प्रत्येक बिंदु अपने-अपने वृत्त पर यही करता है और इन सभी वृत्तों के केंद्र अक्ष पर होते हैं।

ऐसा क्यों होता है: घूर्णन का अर्थ ही यही है — वस्तु के सभी भाग उससे गुजरती एक काल्पनिक रेखा के परित: वृत्ताकार पथों पर घूमते हैं। केवल दो बिंदु स्थान नहीं बदलते — उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव — क्योंकि वे स्वयं अक्ष पर स्थित हैं।
यह भी कीजिए: एक स्टिकर विषुवत रेखा के पास और एक उत्तरी ध्रुव के निकट लगाइए। एक चक्कर में दोनों अपना-अपना वृत्त समान समय में पूरा करते हैं, परंतु विषुवत रेखा वाले स्टिकर का वृत्त कहीं बड़ा होता है — अर्थात विषुवत रेखा पर स्थित स्थान अंतरिक्ष में कहीं अधिक तेज़ी से भाग रहा होता है।
प्र2.
अब टॉर्च से लगभग 1.5 m दूरी पर रखे ग्लोब पर प्रकाश डालिए जैसा कि चित्र 12.4 (ख) में दर्शाया गया है। क्या आपने ध्यान दिया कि किस प्रकार ग्लोब का आधा भाग टॉर्च के प्रकाश से प्रकाशमान होता है जबकि दूसरे आधे भाग में अँधेरा रहता है?
उत्तर

हाँ। टॉर्च को सूर्य मानकर अँधेरे कमरे में देखने पर ग्लोब का ठीक आधा भाग प्रकाशमान रहता है और दूसरे आधे भाग में अँधेरा रहता है, तथा दोनों के बीच एक स्पष्ट सीमा दिखाई देती है।

ग्लोब का भागयह क्या निरूपित करता है
टॉर्च के सामने वाला आधा भागदिन का समय
टॉर्च से परे वाला आधा भागरात का समय
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सीधी रेखाओं में चलता है और पृथ्वी एक अपारदर्शी गोला है। कोई भी गोला किसी दूरस्थ स्रोत के सामने अपनी आधी सतह ही रख सकता है; शेष भाग उसी की छाया में रहता है। वास्तविक सूर्य बहुत दूर है, इसलिए उसकी किरणें हम तक लगभग समांतर पहुँचती हैं — यही कारण है कि प्रकाशित भाग ठीक आधा होता है।
सुझाव: टॉर्च को कम से कम लगभग 1.5 m दूर रखिए। बहुत पास लाने पर प्रकाश-पुंज आधे से कम भाग पर पड़ता है और दिन-रात की सीमा स्पष्ट नहीं बनती।
प्र3.
भारत में सूर्योदय सर्वप्रथम पूर्वी भाग में होता है और इसके पश्चात अन्य भागों में होता है। ग्लोब पर भारत के पूर्वी भाग को देखते हुए ग्लोब को एक दिशा में घुमाइए और इसके पश्चात इसे विपरीत दिशा में घुमाइए। जब प्रकाश सर्वप्रथम भारत के पूर्वी भाग पर पड़ता है तब घूर्णन की दिशा क्या होती है?
उत्तर

जब ग्लोब उत्तरी-दक्षिणी अक्ष के सापेक्ष पश्चिम से पूर्व की ओर घूमता है, तब प्रकाश सर्वप्रथम भारत के पूर्वी भाग पर पड़ता है।

ग्लोब को दूसरी दिशा में (पूर्व से पश्चिम) घुमाइए तो टॉर्च का प्रकाश अरुणाचल प्रदेश से पहले गुजरात पर पड़ेगा — जो भारत की वास्तविक स्थिति के विपरीत है। अतः वह दिशा गलत सिद्ध हो जाती है।

ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश सबसे पहले उसी स्थान पर पड़ता है जो सबसे पहले प्रकाशित भाग में पहुँचता है। ग्लोब को पूर्व की ओर घुमाने पर अंधकार वाले भाग का पूर्वी किनारा पहले प्रकाश में आता है, अतः पूर्वी भारत मध्य और पश्चिमी भारत से पहले सूर्योदय-रेखा पार कर लेता है।
वास्तविक जाँच: एक ही तिथि को इटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में सूर्योदय द्वारका (गुजरात) से लगभग दो घंटे पहले होता है — फिर भी दोनों स्थानों की घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं, क्योंकि पूरे भारत में एक ही मानक समय चलता है।
प्र4.
अब ग्लोब को पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाते हुए पृथ्वी पर अपनी अवस्थिति का अवलोकन कीजिए। क्या यह दिन और रात के चक्र से गुजरती है?
उत्तर

हाँ। आपकी अवस्थिति दर्शाने वाला स्टिकर ग्लोब के प्रत्येक चक्कर में एक पूरा चक्र पूरा करता है।

  • स्टिकर अंधकार वाले भाग से प्रकाशित भाग में प्रवेश करता है — यह सूर्योदय है।
  • वह प्रकाशित भाग में चलता है — यह दिन है, और जब वह टॉर्च के ठीक सामने होता है तब मध्याह्न होता है।
  • वह पुन: अंधकार वाले भाग में प्रवेश करता है — यह सूर्यास्त है।
  • वह अंधकार वाले भाग में चलता है — यह रात है, और इसके बाद फिर सूर्योदय होता है।
ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश सदैव रहता है और सदैव पृथ्वी के आधे भाग पर पड़ता है। दिन भर में प्रकाश में कुछ नहीं बदलता; बदलता यह है कि आपका नगर पृथ्वी के किस आधे भाग में है। पृथ्वी का एक घूर्णन, अर्थात लगभग 24 घंटे, ठीक एक दिन और एक रात देता है।
मुख्य बात: दिन और रात पृथ्वी के घूर्णन के कारण होते हैं, सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के कारण नहीं। परीक्षाओं में यह बहुत सामान्य भूल है।
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