ग्लोब पर अपने नगर की स्थिति पर एक छोटा स्टिकर लगाइए। अब ठीक उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखते हुए ग्लोब को धीरे-धीरे वामावर्त दिशा में घुमाइए।
अवलोकन: स्टिकर ऊपर या नीचे नहीं जाता — वह एक वृत्त पर चलता है जो विषुवत रेखा के समांतर होता है, और एक पूरा चक्कर लगाकर ठीक अपनी मूल स्थिति में लौट आता है। ग्लोब का प्रत्येक बिंदु अपने-अपने वृत्त पर यही करता है और इन सभी वृत्तों के केंद्र अक्ष पर होते हैं।
ऐसा क्यों होता है: घूर्णन का अर्थ ही यही है — वस्तु के सभी भाग उससे गुजरती एक काल्पनिक रेखा के परित: वृत्ताकार पथों पर घूमते हैं। केवल दो बिंदु स्थान नहीं बदलते — उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव — क्योंकि वे स्वयं अक्ष पर स्थित हैं।
यह भी कीजिए: एक स्टिकर विषुवत रेखा के पास और एक उत्तरी ध्रुव के निकट लगाइए। एक चक्कर में दोनों अपना-अपना वृत्त समान समय में पूरा करते हैं, परंतु विषुवत रेखा वाले स्टिकर का वृत्त कहीं बड़ा होता है — अर्थात विषुवत रेखा पर स्थित स्थान अंतरिक्ष में कहीं अधिक तेज़ी से भाग रहा होता है।