प्र1.
अब आप कल्पना कीजिए कि आप पृथ्वी की विषुवत रेखा पर खड़े हैं और पृथ्वी के एक घूर्णन के दौरान आकाश का अवलोकन कर रहे हैं जबकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन कर रही है। आप क्या अवलोकन करेंगे? क्या आपका अवलोकन चित्र 12.6 में दर्शाई गई बालिका के अवलोकन के समान होगा?
उत्तर
हाँ — आपका अवलोकन ठीक वही होगा जो चित्र 12.6 की बालिका का है। विषुवत रेखा पर उत्तर की ओर मुँह करके खड़े होने पर आपका दाहिना हाथ पूर्व की ओर और बायाँ हाथ पश्चिम की ओर होगा, और सूर्य दाएँ से बाएँ आकाश पार करता दिखाई देगा।
| समय | विषुवत रेखा पर उत्तर की ओर मुँह करके आप क्या देखेंगे |
|---|---|
| प्रात:काल | सूर्य आपकी दाहिनी ओर, पूर्व दिशा में, नीचे की ओर प्रकट होता है। |
| मध्याह्न | आप घूमकर नई स्थिति में पहुँच जाते हैं; सूर्य ठीक सिर के ऊपर दिखाई देता है। |
| संध्या | आप और आगे घूम जाते हैं; सूर्य बाईं ओर, पश्चिम दिशा में ओझल हो जाता है। |
| रात्रि | आप अंधकार वाले भाग में होते हैं; आकाश में तारे दिखाई देने लगते हैं। |
ऐसा क्यों होता है: इन घंटों में सूर्य में कुछ नहीं बदला। बदली तो वह दिशा जिसकी ओर आप मुड़े हुए थे, क्योंकि पृथ्वी ने आपको लगभग आधा चक्कर पूर्व की ओर घुमा दिया। सूर्य की पूर्व से पश्चिम की यात्रा वास्तव में आपकी अपनी पश्चिम से पूर्व की यात्रा का ही लेखा है।
सुझाव: रात में ध्रुव तारे की सहायता से (या दिशासूचक से) उत्तर की ओर मुँह करके खड़े होइए। पूर्व दाहिनी ओर और पश्चिम बाईं ओर होगा — इस सरल जाँच से चित्र 12.6 आसानी से समझ आ जाता है।