कक्षा ७ विज्ञान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पृथ्वी अपने घूर्णन-अक्ष पर — उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव से गुजरती एक काल्पनिक रेखा पर — लगभग 24 घंटे में एक घूर्णन पूरा करती है। उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखने पर यह घूर्णन वामावर्त अर्थात पश्चिम से पूर्व की ओर होता है। क्योंकि हम आकाश को एक घूमती हुई पृथ्वी से देखते हैं, इसलिए सूर्य, चंद्रमा और तारे केवल गतिमान प्रतीत होते हैं। ये पूर्व में उदित और पश्चिम में अस्त होते दिखाई देते हैं — ठीक वैसे ही जैसे चक्रीय हिंडोले पर बैठने पर वृक्ष विपरीत दिशा में घूमते प्रतीत होते हैं। पृथ्वी के घूर्णन से दिन-रात का चक्र बनता है — सूर्य के सामने वाले आधे भाग में दिन और दूसरे आधे भाग में रात। पृथ्वी का अक्ष ध्रुव तारे के बहुत निकट इंगित करता है, अतः वह लगभग स्थिर प्रतीत होता है और सप्तर्षि जैसे सभी तारे उसके चारों ओर घूमते दिखाई देते हैं। पृथ्वी लगभग वृत्ताकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा भी करती है और
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| पद | अर्थ | अध्याय से उदाहरण / विवरण | ध्यान रखने योग्य बात |
|---|---|---|---|
| घूर्णन | किसी वस्तु की ऐसी गति जिसमें उसके सभी भाग उससे गुजरती एक काल्पनिक रेखा के परित: वृत्ताकार पथों पर घूमते हैं | लट्टू, छत का पंखा, उँगली पर घूमती गेंद — और पृथ्वी, लगभग 24 घंटे में | यह काल्पनिक रेखा घूर्णन-अक्ष कहलाती है |
| पृथ्वी का घूर्णन अक्ष | उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव से गुजरती वह रेखा जिस पर पृथ्वी घूमती है | उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखने पर पृथ्वी वामावर्त, पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है | यह कक्षा के सापेक्ष झुका हुआ है और ध्रुव तारे के बहुत निकट इंगित करता है |
| परिक्रमण | किसी वस्तु की किसी अन्य वस्तु के चारों ओर की गति | पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर लगभग 365 दिन और 6 घंटे में; चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर | घूर्णन अपने अक्ष पर घूमना है, परिक्रमण किसी अन्य पिंड के चारों ओर घूमना |
| कक्षा | वह पथ जिस पर कोई पिंड किसी अन्य पिंड के परित: गमन करता है | ऊपर से देखने पर सूर्य के परित: पृथ्वी की कक्षा लगभग वृत्ताकार है | पुस्तकों में यह दीर्घवृत्ताकार केवल इसलिए दिखती है क्योंकि वह चित्र पार्श्व दृश्य होता है |
| दिन और रात | पृथ्वी के प्रकाशित आधे भाग में दिन, अंधकार वाले आधे भाग में रात | अवस्थिति के प्रकाश में आते ही सूर्योदय, अंधेरे में जाते ही सूर्यास्त (चित्र 12.5) | ये घूर्णन के कारण होते हैं — परिक्रमण के कारण नहीं |
| ध्रुव तारा | उत्तरी गोलार्ध में पृथ्वी के अक्ष की दिशा में स्थित तारा | सप्तर्षि रात भर इसके चारों ओर घूमता प्रतीत होता है (चित्र 12.7) | अक्ष इसी की ओर इंगित करता है, इसलिए यह लगभग स्थिर दिखता है |
| ऋतुएँ | ग्रीष्म, शीत आदि का वार्षिक चक्र | जून — उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका, ग्रीष्म ऋतु; दिसंबर — शीत ऋतु | कारण अक्ष का झुकाव और पृथ्वी की गोल आकृति है |
| अयनांत | वह दिन जब दिन की अवधि सबसे लंबी अथवा सबसे छोटी होती है | उत्तरी गोलार्ध में लगभग 21 जून (उत्तर-अयनांत) और 22 दिसंबर (दक्षिण-अयनांत) | 21 जून को उत्तरी ध्रुव पर चौबीसों घंटे सूर्य का प्रकाश रहता है |
| विषुव | वह दिन जब दिन की अवधि लगभग 12 घंटे होती है | उत्तरी गोलार्ध में लगभग 21 मार्च (वसंत) और 23 सितंबर (हेमंत) | विषुवत रेखा पर वर्ष के प्रत्येक दिन लगभग 12 घंटे दिन रहता है |
| आभासी आमाप | आँख द्वारा देखा गया किसी वस्तु का आमाप | 5 m दूर खड़े मित्र का पूरा सिर अँगूठे से ढका जा सकता है (क्रियाकलाप 12.4) | यह वास्तविक आमाप और प्रेक्षक से दूरी — दोनों पर निर्भर करता है |
| सूर्य-ग्रहण | चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को हम तक पहुँचने से रोक देता है | छोटे अंधकारमय क्षेत्र में पूर्ण, उसके चारों ओर आंशिक (चित्र 12.13) | इसे कभी सीधे न देखें — केवल प्रतिबिंब अथवा प्रमाणित ग्रहण-चश्मे का उपयोग करें |
| चंद्र-ग्रहण | पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है | पूर्ण चंद्र-ग्रहण में चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखता है (चित्र 12.16) | इसे खुली आँखों से देखना पूर्णतः सुरक्षित है |
अभ्यास
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.1: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.2: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.3: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.4: आइए, अन्वेषण करें
- गहन चिंतन
- विज्ञान एवं समाज
- वैज्ञानिक से परिचय
- आइए, और अधिक सीखें
- अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ