कुतूहल अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पृथ्वी अपने घूर्णन-अक्ष पर — उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव से गुजरती एक काल्पनिक रेखा पर — लगभग 24 घंटे में एक घूर्णन पूरा करती है। उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखने पर यह घूर्णन वामावर्त अर्थात पश्चिम से पूर्व की ओर होता है। क्योंकि हम आकाश को एक घूमती हुई पृथ्वी से देखते हैं, इसलिए सूर्य, चंद्रमा और तारे केवल गतिमान प्रतीत होते हैं। ये पूर्व में उदित और पश्चिम में अस्त होते दिखाई देते हैं — ठीक वैसे ही जैसे चक्रीय हिंडोले पर बैठने पर वृक्ष विपरीत दिशा में घूमते प्रतीत होते हैं। पृथ्वी के घूर्णन से दिन-रात का चक्र बनता है — सूर्य के सामने वाले आधे भाग में दिन और दूसरे आधे भाग में रात। पृथ्वी का अक्ष ध्रुव तारे के बहुत निकट इंगित करता है, अतः वह लगभग स्थिर प्रतीत होता है और सप्तर्षि जैसे सभी तारे उसके चारों ओर घूमते दिखाई देते हैं। पृथ्वी लगभग वृत्ताकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा भी करती है और
अभ्यास
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.1: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.2: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.3: आइए, अन्वेषण करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.4: आइए, अन्वेषण करें
- गहन चिंतन
- विज्ञान एवं समाज
- वैज्ञानिक से परिचय
- आइए, और अधिक सीखें
- अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ