यही वह परिभाषा है जो कंठस्थ करनी चाहिए। इसमें तीन बातें छिपी हैं:
- सभी भाग गति करते हैं — केवल एक बिंदु नहीं। वस्तु का प्रत्येक कण इसमें भाग लेता है।
- प्रत्येक भाग वृत्ताकार पथ पर चलता है — न सीधी रेखा में, न अव्यवस्थित रूप से।
- इन वृत्तों का केंद्र वस्तु से गुजरती एक ही काल्पनिक रेखा पर होता है — यही घूर्णन-अक्ष है।
| घूर्णन करती वस्तु | उसका घूर्णन-अक्ष | कौन-से भाग स्थिर रहते हैं |
|---|---|---|
| लट्टू | उसकी धुरी | धुरी पर स्थित बिंदु |
| छत का पंखा | केंद्र से गुजरता शाफ्ट | हब का केंद्र |
| पृथ्वी | उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से गुजरती रेखा | दोनों ध्रुव |