यह परियोजना पूरे अध्याय को एक मेज़ पर बने प्रतिरूप में बदल देती है। एक नियम कभी न तोड़िए: ग्लोब का अक्ष वृत्त की प्रत्येक स्थिति पर एक ही दिशा में — कमरे के एक ही कोने की ओर — झुका रहना चाहिए। स्टैंड को घुमाकर लैंप की ओर मत कीजिए।
व्यवस्था कैसे करें
- अँधेरे कमरे में मेज़ के बीच बिना शेड का एक विद्युत लैंप रखिए। यही सूर्य है।
- लैंप के चारों ओर लगभग 60–75 cm त्रिज्या का वृत्त खींचिए और उस पर चार स्थान अंकित कीजिए — जून, सितंबर, दिसंबर, मार्च।
- ग्लोब को झुकाव एक ही दिशा में बनाए रखते हुए वृत्त पर घुमाइए और प्रत्येक चिह्न पर रुकिए।
(i) प्रत्येक गोलार्ध का कितना भाग प्रकाशित होता है
| स्थिति | उत्तरी गोलार्ध | दक्षिणी गोलार्ध | ध्रुव |
|---|---|---|---|
| जून | आधे से अधिक भाग प्रकाशित | आधे से कम भाग प्रकाशित | उत्तरी ध्रुव पूर्णतः प्रकाशित; दक्षिणी ध्रुव पूर्णतः अंधकार में |
| सितंबर | ठीक आधा | ठीक आधा | प्रकाश-अंधकार की सीमा दोनों ध्रुवों से गुजरती है |
| दिसंबर | आधे से कम भाग प्रकाशित | आधे से अधिक भाग प्रकाशित | उत्तरी ध्रुव पूर्णतः अंधकार में; दक्षिणी ध्रुव पूर्णतः प्रकाशित |
| मार्च | ठीक आधा | ठीक आधा | प्रकाश-अंधकार की सीमा दोनों ध्रुवों से गुजरती है |
(ii) और (iii) दिन-रात की अवधि — प्रत्येक स्थिति पर ग्लोब को धीरे-धीरे घुमाइए और दिल्ली, विषुवत रेखा तथा ऑस्ट्रेलिया पर लगे स्टिकरों को देखिए। अनुमान लगाइए कि प्रत्येक चक्कर का कितना भाग प्रत्येक स्टिकर प्रकाश में बिताता है।
| ग्लोब पर स्थान | जून की स्थिति | मार्च / सितंबर | दिसंबर की स्थिति |
|---|---|---|---|
| दिल्ली (उत्तरी गोलार्ध) | दिन रात से लंबा | दिन ≈ रात | दिन रात से छोटा |
| विषुवत रेखा पर | दिन ≈ रात | दिन ≈ रात | दिन ≈ रात |
| ऑस्ट्रेलिया (दक्षिणी गोलार्ध) | दिन रात से छोटा | दिन ≈ रात | दिन रात से लंबा |
| उत्तरी ध्रुव | चौबीसों घंटे दिन | ठीक सीमा पर | चौबीसों घंटे रात |